हमारा हक़: लाडली लक्ष्मी योजना

मध्य प्रदेश की लगभग 3.5 करोड़ महिलाओं के पक्ष में बनी सरकारी योजनाओं को आप तक लाने और उसका लाभ प्राप्त करने के उपाय पर हम समवेत ने एक ख़ास पहल की है। हमारी कोशिश है कि प्रदेश की बालिकाओं और महिलाओं को उनके हित के लिए बनी योजनाओं का पूरा ज्ञान हो और सभी उसका भरपूर फ़ायदा उठा सकें। इसी संदर्भ में हम आज एक ख़ास कड़ी की शुरूआत कर रहे हैं। Her Rights यानी हमारा हक़। आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से भी अपने हक के लिए पहल कर सकती हैं। हमें इमेल कर सकती हैं, या हमारे पते पर पत्र भी भेज सकती हैं।

Updated: Jan 23, 2022, 10:28 AM IST

हमारा हक़: लाडली लक्ष्मी योजना
Photo Courtesy: Amrita Rai

भोपाल। बीते दिनों केंद्र सरकार ने बेटियों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 साल किए जाने संबंधी विधेयक के जरिए बालिकाओं और महिलाओं के पक्ष में एक बड़ा कदम उठाया है। बालिकाओं की परिपक्वता और आत्मनिर्भरता के संबंध में इसे एक बड़ा कदम बताया जा रहा है। फिलहाल यह विधेयक विस्तृत विमर्श के लिए सेलेक्ट कमेटी के हवाले कर दिया गया है। लेकिन लड़कियों की शिक्षा, उनके विकास और आत्मनिर्भरता की दृष्टि से यह एक प्रगतिशील कदम माना जा सकता है। हालांकि कुछ समूह इसे गैरजरूरी मानते हुए बालिकाओं की वैवाहिक उम्र की जगह उनकी शिक्षा को प्राथमिकता देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाए जाने पर जो़र दे रहे हैं।

यह बहस अपनी जगह है लेकिन बेटियों की शिक्षा-दीक्षा और सरकारी सहायता के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार का एक कानून लगभग 15 वर्षों से काफी लाभप्रद रहा है। सरकारी दावों के मुताबिक बीते डेढ़ दशक में लगभग 41 लाख बालिकाओं ने इसका फायदा उठाया है। इस योजना का नाम है लाडली लक्ष्मी योजना। जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने सन 2007 में शुरू किया था।

समाज में बालिकाओं के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार के उद्देश्य से शुरु की गई लाडली लक्ष्मी योजना का एक प्रमुख उद्देश्य बाल विवाह में कमी लाना था। सरकारी दावों के मुताबिक इस पहल से बाल विवाह रोकने में कुछ हद कर सफलता भी मिली है।

योजना के लाभार्थियों की बढ़ती संख्या तथा संचार के नए उपकरणों के आ जाने के बाद सरकार ने इसमें कई बदलाव भी किए हैं। अब इसे ई- लाडली का रूप भी दिया गया है। जिसके तहत लोक सेवा केंद्र/ इंटरनेट कैफे /आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से भी महिला बाल विकास विभाग की परियोजना कार्यालय को ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

प्रदेश की बालिकाओं को मिलने वाले लाभ को स्थाई बनाने हेतु सरकार द्वारा "मध्य प्रदेश लाडली लक्ष्मी (बालिका प्रोत्साहन) अधिनियम' 2018" के तहत बालिका को मिलने वाली राशि की गारंटी भी दी है। यानी इस कानून के दायरे में आनेवाली बच्चियां और उनके माता पिता अपने हक के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकती हैं।

आइए देखते हैं कि इसकी पात्रता की शर्तें क्या हैं और किस तरह से बालिकाएं इसका फायदा उठा सकती हैं। 

पात्रता और शर्तें (सामान्य प्रकरणों के लिए)

1. माता पिता मध्य प्रदेश के मूलनिवासी हों।

2. एक जनवरी 2006 या उसके बाद जन्मी बालिका।

3. माता-पिता जिनकी दो या दो से कम संतान हों। तथा द्वितीय संतान के जन्म पर परिवार नियोजन अपनाया गया हो।

4. माता-पिता आयकर दाता ना हो

5. प्रथम प्रसव की ऐसी बालिका जिसका जन्म 1 अप्रैल 2008 को अथवा उसके बाद हुआ हो, को बिना परिवार नियोजन के लाभ दिया जाएगा द्वितीय प्रसव उपरांत परिवार नियोजन की शर्त यथावत रहेगी।

पात्रता और शर्तें (विशेष प्रकरणों के लिए)

1. जिस परिवार में अधिकतम दो संतान हैं तथा माता अथवा पिता की मृत्यु हो गई है, उस बालिका के जन्म के 5 वर्ष तक की आयु होने पर पंजीयन कराया जा सकता है। परंतु  इस प्रकार के प्रकरण में यदि महिला/ पुरुष की दूसरी शादी होती है तथा पूर्व से ही दो बच्चे हैं तो दूसरी शादी से उत्पन्न पुत्री को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

2. प्रथम प्रसूति के समय एक साथ तीन बालिकाओं के होने पर भी तीनों बालिकाओं को लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा।

3. जेल में बंद महिला कैदियों की जन्मी पात्र बालिकाओं को भी योजना अंतर्गत लाभान्वित किया जावेगा।

4. स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जिन परिवारों द्वारा परिवार नियोजन नहीं अपनाया गया है, उन प्रकरणों में 1 वर्ष के स्थान पर 2 वर्ष तक प्रकरण स्वीकृत करने के अधिकार कलेक्टर को दिए गए हैं।

5. बलात्कार पीड़ित बालिका या महिला से जन्मी संतान बालिका को योजना का लाभ दिया जाएगा।

6. विलंब से प्राप्त आवाज आवेदनों का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए विशेष प्रकरण के तहत स्वीकृति /अस्वीकृति जिला कलेक्टर प्रदान करेंगे।

7. समस्त अनाथ बालिकाओं को योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।

 ई-लाड़ली अंतर्गत सुविधाएं

1. कोई भी हितग्राही इंटरनेट सेवा/ कैफे/ आंगनबाड़ी के माध्यम से योजना अंतर्गत आवेदन कर सकता है।

3. जन्म के एक साल के अंदर आवेदन करना अनिवार्य है>

4. माता-पिता की पहली संतान हो,

2. हितग्राही बालिका के पंजीयन क्रमांक, बालिका के नाम, जन्मतिथि, माता पिता के नाम से बालिका की जानकारी योजना की वेबसाइट ladlilaxmi.mp.gov.in से प्राप्त की जा सकती है।

योजना का स्वरूप

1 प्रकरण स्वीकृत उपरांत रुपए 1,18,000 रूपये का आश्वासन प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

2. योजना के पात्र हितग्राहियों को राशि का भुगतान किश्तों में होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कक्षा छठवीं में प्रवेश पर रुपए 2000/-  कक्षा 9वी में प्रवेश पर रुपए 4000/-  कक्षा 11वीं में प्रवेश पर रु 6000/- एवं 12वीं में प्रवेश पर रुपए 6000/-  ईपेमेंट के माध्यम से किया जावेगा।

3. बाकी के एक लाख रूपये प्राप्त करने के लिए उसे 21 वर्ष तक कुआंरी रहना है और कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित होने का सर्टिफिकेट दिखाना है। इस शर्त पर ही उसे राशि प्राप्त होगी।

दावा है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना आरंभ होने से अब तक 41लाख से अधिक बालिकाओं को इसका लाभ दिया जा चुका है। इस वित्तीय वर्ष यानी  2021-22 में 13 जनवरी 2022 तक 2,20,128 बालिकाओं को योजना के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है। योजना प्रावधान अनुसार 2,47,259 बालिकाओं को राशि रुपए 80 करोड़ की छात्रवृत्ति भी वितरित की गई है।

प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना को वृहद स्तर पर स्वीकार किया गया है। ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रदेश में पिछले एक दशक में लिंगानुपात में सुधार लाने में भी इस योजना का अहम योगदान रहा है। बाल विवाह की संख्या में भी गिरावट आई है। हालांकि समाज में बालिकाओं के प्रति सोच में परिवर्तन एवं बालिका शिक्षा के स्तर में सुधार में उल्लेखनीय बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है।