MP हाईकोर्ट में शाहरुख़, धोनी सहित 6 के खिलाफ PIL, जुआ खेलने के लिए युवाओं को प्रेरित करने का आरोप

याचिकाकर्ता ने की अन्य राज्यों के तर्ज पर एमपी में भी ऑनलाइन गैंबलिंग बैन करने की मांग, उच्च न्यायालय ने कहा शासन भी होनी चाहिए पक्षकार, 10 मई तक बढ़ी सुनवाई की तारीख

Updated: May 03, 2022, 02:59 PM IST

MP हाईकोर्ट में शाहरुख़, धोनी सहित 6 के खिलाफ PIL, जुआ खेलने के लिए युवाओं को प्रेरित करने का आरोप

इंदौर। IPL के जुनून के बीच मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय में फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, क्रिकेटर एमएस धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा सहित छः लोगों के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने सभी सेलेब्रिटी पर आरोप लगाया है कि वे देश के युवाओं को जुए व सट्टे की गंदगी में धकेल रहे हैं। यह याचिका उच्च न्यायालय के इंदौर खंडपीठ में अधिवक्ता विनोद द्विवेदी द्वारा दायर की गई है।

द्विवेदी के मुताबिक फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, क्रिकेटर्स महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा और दो अन्य सेलेब्रिटी युवाओं को ऑनलाइन जुआ खेलने के लिए प्रेरित करते हैं। इस बाबत उन्होंने पक्षकारों को न्यायिक नोटिस भी भिजवाया जिसका किसी ने अबतक जवाब नहीं दिया है। द्विवेदी ने बताया कि कई राज्यों में ऐसे सर्विसेज को प्रतिबंधित कर दिया गया है लेकिन मध्य प्रदेश में प्रतिबंधित नहीं है।

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कल सोमवार को जब दो जजों की बेंच पर याचिका की सुनवाई हुई तो नयाधीशों ने सवाल उठाया कि यदि प्रतिबंध का सवाल है तो याचिका में सरकार को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया है। द्विवेदी ने न्यायालय से याचिका में संशोधन के लिए मोहलत मांगी तो सुनवाई की तिथि 10 मई तक के लिए बढ़ा दी गई है। अब द्विवेदी इन सेलिब्रिटीज के साथ साथ शासन को भी याचिका में पक्षकार बनाएंगे। 

द्विवेदी ने बताया कि ये सेलिब्रिटी विज्ञापनों के जरिए युवाओं को बताते हैं कि आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाना उनके लिए त्वरित कमाई का साधन बन सकता है। द्विवेदी का मानना है कि युवा इन सेलिब्रिटीज को अपना आदर्श मानते हैं और उनके ही जैसा बनना चाहते हैं। जब युवा इन्हें किसी भी चीज का प्रचार करते देखते हैं तो स्वयं भी उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित होते हैं।

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ऑनलाइन गेम, सट्टा व जुआ की वजह से पिछले कुछ सालों में राज्य में कई आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। जब युवा सट्टा लगा कर हार जाते हैं और उधार चुकाने के पैसे नहीं होते तो शर्मिंदगी के कारण वे आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। द्विवेदी ने न्यायालय से मांग की है कि इन मोबाइल एप्लिकेशन पर त्वरित रोक लगाई जाए।