महाराष्ट्र के परभणी में हनुमान मंदिर की छत गिरी, 7 श्रद्धालुओं की मौत और 25 घायल

महाराष्ट्र के परभणी जिले के यशवाड़ी हनुमान मंदिर में निर्माणाधीन सभामंडप की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। मलबे में दबने से 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।

Updated: Jun 20, 2026, 04:11 PM IST

परभणी। महाराष्ट्र के परभणी जिले में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यशवाड़ी देवस्थान स्थित हनुमान मंदिर के सामने बन रहे निर्माणाधीन सभामंडप की छत अचानक ढह गई। हादसे के समय मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मलबे में दबने से 7 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 25 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार, मंदिर के सामने नए सभामंडप का निर्माण कार्य चल रहा था। दोपहर के समय श्रद्धालु दर्शन पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। तभी निर्माणाधीन ढांचे का सेंट्रिंग स्ट्रक्चर अचानक टूट गया। इसके साथ ही छत और पत्थरों का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर पड़ा। जिससे वहां मौजूद लोग मलबे के नीचे दब गए।

इस हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोपहर करीब 3 बजे श्रद्धालु प्रसाद लेने के लिए कतार में खड़े थे। तभी बांस और लोहे की रॉड से तैयार किया गया सेंट्रिंग स्ट्रक्चर अचानक ढह गया और देखते ही देखते पूरा हिस्सा गिर पड़ा। शनिवार होने के कारण मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ थी। जिससे हादसे में प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ गई।

घटना के तुरंत बाद पुलिस, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान में आपदा प्रबंधन दल, पथरी अग्निशमन विभाग, मानवत लोक निर्माण विभाग, जिला स्वास्थ्य अधिकारी की टीम, चिकित्सा दल, परभणी नगर निगम के कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर मलबा हटाया और फंसे लोगों को बाहर निकाला।

जिला कलेक्टर संजय चव्हाण, उपमंडल अधिकारी संगीता चव्हाण और तहसीलदार पांडुरंग माछेवाड़ ने बताया कि हादसे में कुल 32 लोग प्रभावित हुए। इनमें 7 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 25 घायल हैं। जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

यशवाड़ी गांव मानवत रोड पर स्थित है और यह छत्रपति संभाजीनगर से लगभग 190 किलोमीटर दूर है। इस स्थान पर स्थित त्रिमूर्ति मंदिर में भगवान हनुमान की काली प्रतिमा स्थापित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।