गठबंधन में रहना है तो योगी योगी करना होगा, यूपी की सियासत ने बढ़ाई बिहार की राजनीतिक सरगर्मी

बीजेपी सांसद अजय निषाद ने वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी पर बड़ा हमला बोला, यूपी में बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ प्रचार करने की संभावनाओं को लेकर बीजेपी सांसद ने मुकेश सहनी पर कई तीखे वार किए, बीजेपी सांसद ने वीआईपी को बिहार के गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखा देने की धमकी भी दे डाली

Publish: Jan 13, 2022, 12:22 PM IST

गठबंधन में रहना है तो योगी योगी करना होगा, यूपी की सियासत ने बढ़ाई बिहार की राजनीतिक सरगर्मी
Photo Courtesy: Aaj Tak

लखनऊ/पटना। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के कारण राज्य में सियासी हलचल तेज़ है। लेकिन यूपी की सियासी हलचल का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ रहा है। यूपी में जारी घमासान ने बिहार का राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। बिहार के एक बीजेपी सांसद ने गठबंधन के साथी वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को चेतावनी दे डाली है। मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद ने कहा है कि अगर मुकेश सहनी को बिहार सरकार के गठबंधन में रहना है तो उन्हें योगी योगी करना होगा। 

बीजेपी सांसद ने यह बयान यूपी में वीआईपी के राजनीतिक स्टैंड को लेकर दिया है। बिहार सरकार मंत्री मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ प्रचार करने और अपने उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बना रही है। मुकेश सहनी की इसी योजना के संबंध में अजय निषाद का कहना है कि अगर गठबंधन को केवल बिहार तक सीमित रखा गया, तो यूपी में बीजेपी के खिलाफ प्रचार का खामियाजा बिहार के गठबंधन से बाहर होकर भुगतना पड़ेगा। 

अजय निषाद ने मुकेश सहनी के खिलाफ बयानबाजी करते हुए कहा कि वीआईपी का अपना कोई जनाधार नहीं है। बीजेपी के बिना वीआईपी का कोई वजूद नहीं है। बीजेपी सांसद ने कहा कि अगर यूपी में वीआईपी बीजेपी के खिलाफ काम करेगी तो मुजफ्फरपुर की रिक्त बोचहा सीट पर बीजेपी अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी। बोचहा सीट पर बीते विचानसभा चुनाव में वीआईपी के मुसाफिर पासवान ने जीत हासिल की थी। नवंबर महीने में उनका निधन हो गया था। 

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लिहाजा अजय निषाद ने वीआईपी को यह खुली चेतावनी दे डाली है कि अगर वीआईपी बीजेपी के विरोध में गई तो बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन भी खतरे में पड़ सकता है। अजय निषाद ने कहा कि अगर गठबंधन में रहना है तो योगी योगी कहना होगा। 

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हालांकि अजय निषाद की यह चेतावनी खुद बिहार सरकार पर भारी पड़ सकती है। क्योंकि मौजूदा वक्त में नीतीश सरकार वीआईपी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के सहारे की सरकार में मौजूद है। बिहार में बहुमत के लिए 122 का आंकड़ा होना जरूरी है। लेकिन बीजेपी(74) और जेडीयू(43) को मिलाकर विधायकों की संख्या 117 होती है। वीआईपी और हम के चार चार विधायकों के समर्थन से जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन की अल्पमत की सरकार चल रही है। ऐसे में अगर बीजेपी वीआइपी को बाहर का रास्ता दिखाने पर विचार करती है या खुद वीआईपी सरकार से अलग होना का फैसला करती है, तब बिहार में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। वीआईपी के अलावा खुद जीतन राम मांझी की हम भी समय समय पर नीतीश सरकार और बीजेपी से अलग हटकर अपना स्टैंड लेती रहती है।