भोपाल। राजधानी भोपाल से आबकारी विभाग से बड़े बैंक फ्रॉड का मामल सामने आया है। शराब दुकान का लाइसेंस हासिल करने के लिए 2 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक की सिक्योरिटी मनी के बदले फर्जी ई एफडीआर और बैंक सत्यापन रिपोर्ट जमा कर दिया गया है। पीएंडटी चौराहा शराब दुकान समूह के तत्कालीन लाइसेंसधारी जसवंत पर दस्तावेजों में हेराफेरी करने का आरोप है। आबकारी विभाग की शिकायत पर कोहेफिजा पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में शराब दुकान समूह के आवंटन से जुड़ा है। आबकारी विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, पीएंडटी चौराहा स्थित BPL/F-14 शराब दुकान समूह जसवंत को 27 करोड़ 55 लाख 35 हजार 348 रुपये के वार्षिक मूल्य पर आवंटित किया गया था। नियमानुसार लाइसेंसधारी को इस राशि का 10 प्रतिशत यानी 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये सिक्योरिटी के रूप में जमा करना आवश्यक था।

सिक्योरिटी मनी के लिए जसवंत ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की 12 मई 2024 की ई फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (ई-एफडीआर) आबकारी विभाग में प्रस्तुत की थी। इसके बाद 20 मई 2024 को अपनी ईमेल आईडी से बैंक की सत्यापन रिपोर्ट भी विभाग को भेजी गई थी।

बाद में इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। जिसके बाद आबकारी विभाग ने बैंक से दोबारा जांच कराने का फैसला लिया। विभाग ने 10 और 12 अक्टूबर को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की एमपी नगर शाखा को पत्र भेजकर एफडीआर और सत्यापन रिपोर्ट की पुष्टि मांगी।

12 अक्टूबर को बैंक की ओर से जारी दो अलग-अलग पत्रों में स्पष्ट किया गया कि संबंधित ई एफडीआर और सत्यापन रिपोर्ट बैंक ने जारी नहीं की थी। इस जवाब के बाद दस्तावेजों को कूटरचित मानते हुए आबकारी विभाग ने लाइसेंसधारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय ने इस संबंध में 17 अक्टूबर को कोहेफिजा थाना प्रभारी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसी पत्र के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

कोहेफिजा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह के मुताबिक, सहायक आबकारी आयुक्त से प्राप्त पत्र के आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जांच में अब यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, उन्हें विभाग तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही और सिक्योरिटी मनी से जुड़े इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल लाइसेंसधारी पर लगे आरोपों की जांच जारी है।