उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का आज दूसरा दिन है। विजयादशमी के पावन अवसर पर उज्जैन से भव्य शुभारंभ के बाद यात्रा अब देवास जिले के सिंदुरिया गांव की ओर बढ़ रही है। दिग्विजय सिंह साधु-संतों और अन्य सहभागियों के साथ पदयात्रा करते हुए सत्य, न्याय, सदाचार और धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता का संदेश लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
बुधवार को सुबह करीब 9 बजे तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई। यात्रा में दिग्विजय सिंह हजारों की संख्या में समर्थकों और साधु-संतों के साथ पैदल चल रहे हैं। इस दौरान दिग्विजय सिंह जगह-जगह चंदा चोरी और वोट चोरी को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि चंदा चोरों को पकड़ो, जेल भेजो, बचाओ मत। वोट चोरी बंद करो। EVM हमें नहीं चाहिए। हमें बैलेट पेपर से चुनाव चाहिए।
दिग्विजय सिंह के साथ इस यात्रा में उनकी पत्नी अमृता राय भी शामिल हैं। उन्होंने सनातन धर्म को सत्य, गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। अमृता राय ने कहा कि सनातन धर्म ही परम सत्य है और यही हमारा गौरव और स्वाभिमान है। हम इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिव एक दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि राम हमारे आदर्शों और आचरण की मर्यादा का प्रतीक हैं।
अमृता राय ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य शिव के दर्शन को राम के आदर्शों के साथ जोड़ना है। साथ ही समाज की उन स्थापित संस्थाओं के साथ विश्वास बनाए रखना भी है, जिनमें लोग आस्था रखते हैं और जो उनके लिए श्रद्धा के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि समाज की आस्था से जुड़ी संस्थाओं के साथ धोखा नहीं होना चाहिए। सनातन धर्म, उसके दर्शन और आदर्शों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही इस यात्रा की सोच है।
बता दें कि करीब 930 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा उज्जैन से शुरू होकर ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या में भगवान श्रीराम के धाम तक पहुंचेगी। यात्रा के पहले दिन उज्जैन में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और साधु-संतों के जयघोष के बीच इसका भव्य शुभारंभ हुआ था। यात्रा में देशभर से आए सैकड़ों साधु-संत शामिल हुए हैं।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में धार्मिक स्थलों पर दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता, मंदिरों की संपत्तियों एवं निर्माण कार्यों से जुड़ी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा को लेकर जनजागरण शामिल है। यात्रा को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सहित कई संतों का समर्थन और आशीर्वाद भी मिला है।