जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में प्रतिमा विसर्जन के दौरान बिजली का करंट फैलने से दो युवकों की मौत हो गई। जबकि, 10 से अधिक लोग झुलस गए। हादसा बुधवार रात करीब 1 बजे मझौली थाना क्षेत्र में हुआ। घायलों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। स्थानीय लोगों ने बिजली के तार नीचे लटकने की शिकायत पहले ही किए जाने के बावजूद सुधार नहीं होने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन पाठ की प्रतिमा को नरीली तालाब में विसर्जित करने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली से ले जाया जा रहा था। जुलूस में 50 से अधिक लोग शामिल थे। सिविल लाइन के पास रास्ते में नीचे लटक रहे बिजली के तार को ऊपर उठाने की कोशिश की गई। इसी दौरान तार 440 वोल्ट की लाइन के संपर्क में आ गया और करंट फैल गया।
बिजली का तार टूटकर ट्रैक्टर ट्रॉली पर गिर गया था जिससे वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे में विकास राजपूत (22) और प्रिंस चौहान (23) की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
हादसे में मयंक राजपूत, विक्की रैकवार, मनीष राजपूत और आयुष रैकवार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शुरुआत में सभी घायलों को मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
सूचना मिलने पर मझौली थाना प्रभारी पूर्वा चौरसिया पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल भिजवाया। हादसे में झुलसे अन्य लोगों का भी उपचार कराया गया।
स्थानीय लोगों ने हादसे के बाद स्वास्थ्य केंद्र में उपचार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर वहां पर्याप्त स्टाफ मौजूद नहीं था और डॉक्टर करीब आधे घंटे बाद पहुंचे। लोगों के मुताबिक, इस देरी के बीच विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौत हो चुकी थी। हालांकि, इलाज में देरी को लेकर लगाए गए इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद विधायक अजय बिश्नोई भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हादसे को दुखद बताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जिस किसी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि बिजली के तार नीचे लटकने की समस्या से संबंधित जानकारी पहले ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और समिति के सदस्यों के साथ हुई बैठक में दी गई थी। तारों को ठीक कराने की मांग भी रखी गई थी लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।