अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। जबकि, तेहरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजराइल के नए हमले की स्थिति में वह खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है। इससे संचार नेटवर्क, बैंकिंग, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

फ्लोरिडा में शुक्रवार को आयोजित एक रैली के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका एक और छोटा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कर सकता है। इसी नाम से अमेरिकी सेना ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को संबोधित किया था। हालांकि, ट्रम्प ने संभावित नए हमले की तारीख, उसके दायरे या सैन्य रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि अमेरिका इस युद्ध को बहुत जल्द समाप्त कर सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संघर्ष को पूरी तरह खत्म करना चाहिए या फिर उसे धीरे धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। उनके मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वे चीजें मिल रही हैं। जिन्हें वह हासिल करना चाहता है।

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होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रम्प के बयान पहले भी बदलते रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों से तय होगा कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में किस राजनीतिक दल का नियंत्रण रहेगा।

हालांकि, द न्यूयॉर्क टाइम्स की 21 अक्टूबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी और इजराइली सेनाएं मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर संभावित हमलों की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित लक्ष्यों में ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठान, परमाणु केंद्र और मिसाइलों तथा ड्रोन का भंडार शामिल हो सकते हैं।

ईरान की ओर से दी गई चेतावनी ने संघर्ष को एक नए मोर्चे तक पहुंचने की आशंका बढ़ा दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के दोबारा हमले की स्थिति में समुद्र के नीचे बिछे संचार नेटवर्क को निशाना बनाने की योजना पर विचार किया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन केबलों पर, किस स्थान पर और किस तरीके से हमला किया जा सकता है।

एक अधिकारी ने बताया कि ईरान केवल केबलों को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि उनकी मरम्मत के काम में भी बाधा डाल सकता है। ऐसी स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट और दूसरी संचार सेवाओं को बहाल करने में अधिक समय लग सकता है।

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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदुल्लाह जवानी ने बुधवार को कहा था कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला होता है तो तेहरान होर्मुज के नीचे से गुजरने वाली सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

इसके अलावा ईरानी अधिकारी मोहसिन रजाई ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुविधाओं पर हमले की चेतावनी भी दी है। इससे संकेत मिलता है कि संभावित जवाबी कार्रवाई में डिजिटल बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।

समुद्र के नीचे बिछी केबल अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के अनुसार, दुनिया का लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक इन समुद्री केबलों के माध्यम से गुजरता है। इनके जरिए अलग अलग देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा का आदान प्रदान होता है।

हालांकि, टेली जियोग्राफी के रिसर्च डायरेक्टर एलन मौल्डिन के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र से दुनिया की एक प्रतिशत से भी कम अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता गुजरती है। इसलिए इस इलाके में कुछ केबल क्षतिग्रस्त होने से पूरी दुनिया का इंटरनेट सीधे तौर पर ठप होने की आशंका सीमित है।

इसके बावजूद यदि एक साथ कई केबलों को नुकसान पहुंचता है तो संबंधित क्षेत्रों में इंटरनेट की गति घट सकती है और डेटा ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है। बैंकिंग सेवाओं, ऑनलाइन खरीदारी और क्लाउड आधारित कारोबार को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रभावित नेटवर्क का ट्रैफिक दूसरे उपलब्ध मार्गों पर कितनी तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है।

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युद्ध की स्थिति में मरम्मत का काम भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सुरक्षा जोखिम, महंगे बीमा और जरूरी अनुमतियां मिलने में देरी के कारण क्षतिग्रस्त केबलों को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।

ईरान पर संभावित नए हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। शुक्रवार को फ्रांस, तुर्किये और जर्मनी के विदेश मंत्रियों ने संघर्ष को बढ़ने से रोकने तथा कूटनीतिक रास्ता अपनाने पर जोर दिया।

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव को और बढ़ा सकता है तथा युद्ध दूसरे देशों तक फैल सकता है। उन्होंने संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की जरूरत बताई।

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां नोएल बारो ने भी ऐसी कार्रवाई से बचने की अपील की जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़े। उन्होंने चेताया कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तेज होने से किसी पक्ष को फायदा नहीं होगा और इसका गंभीर असर तेल तथा गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।

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वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। इन देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे।