तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 16 लोगों की मौत, सैकड़ों घर जमींदोज
तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से 16 लोगों की मौत और 65 घायल हुए। 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
तिब्बत में आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 65 लोग घायल हुए हैं। प्रभावित इलाकों से 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक भूकंप के बाद 400 से ज्यादा आफ्टरशॉक यानी बाद के झटके दर्ज किए गए।
भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागक्यू शहर के बाछेन काउंटी में था। इसकी गहराई जमीन के भीतर 10 किलोमीटर से भी कम बताई गई है। भूकंप का केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित है। शुरुआती आकलन में 330 से अधिक मकानों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। लगातार झटकों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
तिब्बत में आए भूकंप के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी धरती हिलने की खबर है। पाकिस्तान में 4.9 तीव्रता और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, इन दोनों घटनाओं में जान माल के नुकसान से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
तिब्बत और हिमालय का क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। इन्हीं प्लेटों के टकराव से हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। भूगर्भीय गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में समय समय पर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।
जनवरी 2025 में भी तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उस आपदा में तिब्बत में करीब 400 लोगों की मौत हुई थी। जबकि, पड़ोसी नेपाल में 13 लोगों की जान चली गई थी। इसके झटके उत्तर भारत सहित दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
इससे पहले साल 2010 में चीन के पड़ोसी प्रांत छिंगहाई के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस घटना में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे।
तिब्बत इस साल प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हो गया। बाद में पानी तेजी से नेपाल की ओर बढ़ा और कई गांवों, सड़कों तथा पुलों को नुकसान पहुंचा।
चीनी अधिकारियों के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में इस आपदा के कारण 43 लोगों की मौत हुई थी। जबकि, 519 लोग लापता बताए गए थे। नेपाल में भी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। वहां इस आपदा में 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।




