भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित की गई जमीनों के बदले किसानों को चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग की है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने भूअर्जन अधिनियम 2013 में प्रभावित किसानों को चार गुना मुआवजा दिये जाने का निर्णय लिया था।

शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश शासन द्वारा गत सप्ताह सम्पन्न कैबिनेट बैठक में भूमि के बदले चार गुना मुआवजा दिये जाने के निर्णय का स्वागत किया है पर इस निर्णय को अधिनियम के लागू होने की दिनांक से प्रभावी रखे जाने की मांग की है।

राज्यसभा सांसद सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विगत 12 वर्षों से लगातार यह मांग कर रही है कि किसानों को जमीनों के बदले कानूनी तौर पर उचित मुआवजा मिलना चाहिये। विगत एक दशक में अनेक राड़क परियोजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं सहित अनेक जनहितैषी कार्यों के लिये प्रदेश के किसानों की जमीनें शासन ने उपयोग में ली है। केन्द्र सरकार के अधिनियम के पालन की जगह राज्य सरकार दो गुना मुआवजा देकर किसानों के साथ अन्याय कर रही थी। अनेक छोटे, मध्यम और अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के किसान सरकारी योजना का शिकार बन भूमिहीन हो रहे है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि जब सरकार ने दस साल बाद अपनी गलती स्वीकार कर चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया है तो इसे अधिनियम के प्रकाशन की तिथि से लागू कर विगत दस वर्ष में प्रभावित और पीडित किसानों को चार गुना की दर से मुआवजा दिया जाकर उनके आंसू पोंछे जाने चाहिये। पिछले 3 वर्ष में 55 हजार से अधिक किसानों को 16 हजार करोड़ रूपये का मुआवजा दिया गया। जो दो गुना है। यदि भूमि अधिग्रहण कानून पूर्व से लागू होता तो किसानों को चार गुना मुआवजा मिलता।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि कृषि कल्याण वर्ष 2026 में शासन को किसानों के हित में चार गुना मुआवजा देकर न्याय करना चाहिये। कम मुआवजा मिलने से अनेक किसान अपने ही गांव में किसान से मजदूर बन गए हैं। कम मुआवजा मिलने से प्रभावित किसान खेती करने योग्य जमीन नही खरीद सके है।