भोपाल। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने के विरोध में कांग्रेस दिल्ली से लेकर भोपाल तक प्रदर्शन कर रही है। भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत पार्टी के तमाम दिग्गज उपवास पर बैठे हैं।
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता हाथों में संविधान की प्रति लिए हुए हैं और काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। पार्टी ने कहा कि नामांकन रद्द करना गलत है और यह राजनीतिक साजिश है। कांग्रेस ने कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी।
इससे पहले प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बंद कमरे में एक घंटे तक भविष्य की रणनीति तैयार की। इसके बाद कांग्रेस ने स्थानीय चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात टाल दी। बताया जा रहा है कि दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व ही चुनाव आयोग के फैसले के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात की। आयोग दफ्तर से बाहर आने के बाद कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला गलत है और कानून के मुताबिक नहीं है। जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, उसका कानून में कोई प्रावधान नहीं है।
बकौल सिंघवी मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं था, जिसका उन्हें खुलासा करना पड़ता। सिंघवी ने बताया कि कोर्ट ने सिर्फ एक नोटिस भेजा था। इसमें मीनाक्षी नटराजन से पूछा गया था कि मामले में आगे सुनवाई शुरू की जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में सबसे पहले मजिस्ट्रेट यह तय करते हैं कि मामले की सुनवाई शुरू होगी या नहीं। इसे संज्ञान लेना कहा जाता है। जब तक संज्ञान नहीं लिया जाता, तब तक आपराधिक मामला शुरू नहीं माना जाता।