सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ही महिला को सरकारी रिकॉर्ड में दो अलग-अलग तारीखों पर मृत घोषित कर दिया गया है। धतूरा गांव की कलावती उपाध्याय के नाम पर 25 फरवरी 1989 और फिर 16 अक्टूबर 2013 को अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन का नामांतरण तक करवा लिया गया जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला तब उजागर हुआ जब धतूरा गांव के धर्मकुमारी और कृष्ण कुमार ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 1989 में कलावती उपाध्याय की मृत्यु के बाद विधिवत डेथ सर्टिफिकेट जारी किया गया था। इसके बावजूद 24 साल बाद 2013 में उसी महिला के नाम पर एक और मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया गया जो पूरी तरह संदिग्ध है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 2013 में जारी इस डुप्लीकेट डेथ सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर सजरा और वार्ड पार्षद से प्रमाण पत्र बनवाए गए थे। इसके बाद वसीयत के दस्तावेज जोड़कर तहसील स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जमीन का नामांतरण करा लिया गया था। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई।
इस मामले की जांच में भी गड़बड़ी सामने आई है। एसडीएम की रिपोर्ट में दोहरे मृत्यु प्रमाण पत्र और उससे जुड़े नामांतरण का जिक्र किया गया है। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने जांच कराने के निर्देश दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए नामांतरण को तुरंत निरस्त किया जाए और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई हो।