मध्य प्रदेश में वर्ग 2 और वर्ग 3 शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भोपाल में तेज हो गया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े लेकिन पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच देर रात तक गतिरोध बना रहा था। 

मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने की कोशिश करने वाले कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर खजूरी सड़क थाने भेजा गया। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि पदवृद्धि का लिखित आदेश जारी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वर्ग 2 शिक्षक भर्ती में प्रत्येक विषय के लिए 3,000 अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं। जबकि, वर्ग 3 भर्ती में कुल 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन करने और सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ है।

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शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी गुरुवार को भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। यहां से रैली निकालकर उन्होंने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी चेतक ब्रिज और रोशनपुरा क्षेत्र में पहुंचे जहां उन्होंने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर दी। इससे अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच टकराव जैसी स्थिति बन गई थी। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और देर रात तक मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा जैसे नारों के जरिए भी उन्होंने अपना विरोध जताया।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे 17 नवंबर 2025 से शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षा का परिणाम आने से पहले भी उन्होंने इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया था लेकिन उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत ने बताया कि 6 जनवरी को भोपाल में हुए बड़े प्रदर्शन में हजारों युवा शामिल हुए थे। उस समय पद बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि लगातार विरोध और ज्ञापन देने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।

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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें भर्ती प्रक्रिया में अतिथि शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था से आपत्ति नहीं है। उनकी मांग है कि पदों का निर्धारण करते समय इस प्रावधान के साथ-साथ उपलब्ध रिक्तियों और शिक्षकों की जरूरत का भी ध्यान रखा जाए। नरेंद्र राजपूत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में पदों की संख्या बढ़ाने या घटाने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अतिरिक्त पद क्यों नहीं जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री लिखित रूप में यह बता दें कि पद बढ़ाना संभव नहीं है तो अभ्यर्थी आंदोलन समाप्त कर वापस चले जाएंगे। उनके मुताबिक, केवल आश्वासन देने से युवाओं की समस्या का समाधान नहीं होगा।

अभ्यर्थियों का दावा है कि मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में 1.15 लाख से अधिक पद स्वीकृत हैं। जबकि, मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में लगभग 15 हजार पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं। इसी अंतर को आधार बनाकर वे भर्ती का दायरा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में वर्ग 2 भर्ती के प्रत्येक विषय में 3,000 अतिरिक्त पद जोड़ना और वर्ग 3 के लिए कुल 25 हजार पदों पर भर्ती करना शामिल है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि इससे बड़ी संख्या में योग्य युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। साथ ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, स्वीकृत पदों की संख्या, वास्तविक रिक्तियों और मौजूदा भर्ती में पदों के निर्धारण को लेकर अभ्यर्थियों ने जो आंकड़े पेश किए हैं वे उनके दावे हैं।

आंदोलन के दौरान अभ्यर्थी नेता ईशान श्रीवास्तव ने चयनित और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों से भोपाल पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। वहीं, नरेंद्र राजपूत ने चेतावनी दी कि मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थियों को भोपाल बुलाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पदवृद्धि को लेकर लिखित आदेश जारी नहीं होता तब तक वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने का मुद्दा अब राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जा चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 29 सितंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर वर्ग 2 और वर्ग 3 की भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने पर विचार करने का अनुरोध किया था। राहुल गांधी ने अपने पत्र में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक लाख से अधिक शिक्षक पद रिक्त होने का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसके मुकाबले मौजूदा भर्ती में सीमित पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने की भी मांग की थी।