नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार का दिन हंगामों से भरा रहा। शाम को जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी बोलने आए तो उन्होंने पहले मिडिल ईस्ट संकट पर अपनी बात रखी और फिर एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर हमला बोला। इसके बाद संसद में बवाल मच गया और जमकर नारेबाजी हुई। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को रोकते हुए कहा कि केवल तय विषय पर ही चर्चा करें।

राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भारत पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत के तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। उन्होंने कहा कि हालात का असर अब दिखने लगा है। कुछ जगहों पर रेस्तरां बंद हो रहे हैं, एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ रही है और बाजारों में घबराहट का माहौल है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अगर स्थिति बिगड़ती है तो इसका असर और व्यापक हो सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी देश की बुनियाद उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है। उनके अनुसार भारत को यह अधिकार होना चाहिए कि वह तय करे कि उसे तेल और गैस किस देश से खरीदनी है। 

उन्होंने सवाल उठाया कि भारत जैसा बड़ा देश क्यों किसी दूसरे देश को यह तय करने दे कि भारत रूस से तेल खरीदे या नहीं, या किस देश से ऊर्जा संबंध रखे। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उनके लिए लंबे समय से एक पहेली रही है कि भारत जैसा बड़ा देश अपनी ऊर्जा नीतियों पर बाहरी दबाव क्यों स्वीकार करता है।

संसद में उस समय हंगामा हो गया जब राहुल गांधी ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए एक दस्तावेज़ दिखाने लगे और एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए हरदीप सिंह पूरी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि उनके पास एक ऐसा दस्तावेज़ है जिसमें एक मंत्री के परिवार से जुड़े वित्तीय लेन-देन का जिक्र है। इसी दौरान सभापति ओम बिरला मंत्री पूरी के बचाव में उतर आए और राहुल गांधी को रोकते हुए कहा कि जिस विषय पर नोटिस दिया गया है, उसी पर बोलना होगा।

राहुल गांधी ने बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जवाब देते हुए कहा कि मॉडर्न एनर्जी हिस्ट्री में दुनिया ने ऐसा समय पहले कभी नहीं देखा। भारत की कच्चे तेल (क्रूड) की आपूर्ति की स्थिति सुरक्षित है। अभी क्रूड ऑयल की जितनी मात्रा सुरक्षित की गई है वह उतनी है जितनी होर्मुज से मिल सकती थी। संकट से पहले, भारत का लगभग 45% क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आयात होता था। प्रधानमंत्री की शानदार कूटनीतिक पहुंच और साख की वजह से, भारत ने उतना क्रूड वॉल्यूम हासिल किया है जितना उसी समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मिल सकता था।