भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को पश्चिमाम्नाय श्रीद्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी का भी आशीर्वाद मिला है। द्वारका स्थित शारदापीठ से जारी शुभाशंसनम संदेश में शंकराचार्य  ने उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित यात्रा की पूर्वसूचना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दिग्विजय सिंह के पूर्व में की गई नर्मदा परिक्रमा का भी उल्लेख किया है। इससे पहले उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी भी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के संकल्प की सराहना करते हुए अपना समर्थन और आशीर्वाद दे चुके हैं।

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने अपने संदेश में दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका मध्यप्रदेश में अच्छा प्रभाव देखने को मिला था। उन्होंने कहा कि इससे यह परिलक्षित होता है कि दिग्विजय सिंह देश और धर्म के प्रति स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। शंकराचार्य जी ने इसे प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में दिग्विजय सिंह ने स्वयं ऐसा करके दिखाया है। उन्होंने इसे एक आदर्श नेता का स्वरूप बताया।

शंकराचार्य ने अपने संदेश में धर्म और नीति के संबंध पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत धर्म और नीति का देश रहा है तथा नीति का प्रयोग धर्म को बल देने के लिए किया जाता था। विदुरनीति और शुक्रनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और नीति का मूल वेदों में है, जिनका सरल अनुवाद बाद के ग्रंथों में मिलता है। उनके अनुसार, आज धर्म और नीति का गठबंधन समाप्त हो गया है, जिससे दोनों की हानि हुई है।

स्वामी सदानंद सरस्वती ने सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि सनातन शब्द धर्म का विशेषण है और धर्म उसका विशेष्य है। उन्होंने कहा कि वेदों में जिस धर्म का वर्णन किया गया है, उसमें सनातनत्व निहित है। उनके अनुसार, वेदमूलक न होने वाले धर्म को सनातन नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि वेदोक्त धर्म का मार्गदर्शन और सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदिशंकराचार्य जी ने चार पीठों का निर्धारण किया था।

अपने संदेश में शंकराचार्य ने यह भी कहा कि आज राजनेताओं का धर्म वोट प्राप्त करना रह गया है और राजनेता स्वयं धर्मोपदेशक बन गए हैं। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव श्री महाकाल के चरणों से प्रारंभ होने वाली दिग्विजय सिंह की धार्मिक यात्रा भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पित हो और उन्हें आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हो। उन्होंने भगवान द्वारकाधीश से भी इसके लिए प्रार्थना की।

बता दें कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के दिन उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर धाम से प्रारंभ होकर अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर तक पहुंचेगी। यात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म, मंदिरों में चढ़ावे की चोरी और देवस्थानों की मर्यादा से जुड़े विषयों पर जनजागरण करना तथा सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप और मूल्यों के प्रति समाज को जागरूक करना है।