नई दिल्ली। राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। इस बार भी उनके निशाने पर गृह मंत्री अमित शाह हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमले का आदेश किसने दिया, अमित शाह सामने आएं और इसका जवाब दें। राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह में संसद में आकर हमारे सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। पिछले 15 दिनों में उन्होंने यही दिखाया है। न तो पीएम मोदी और न ही अमित शाह में संसद में आने का हिम्मत है। 

राहुल गांधी ने सवाल किया कि लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया। इसका जिम्मेदार कौन है, वो सामने आए। गृह मंत्री सदन में आकर बयान दें। राहुल ने कहा कि विपक्ष की तीन मांगें हैं। पहली- युवाओं पर गोली चलाने की जिम्मेदारी स्पष्ट हो। दूसरी- प्रधानमंत्री घटना के लिए माफी मांगें और तीसरी- राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर चर्चा हो।

राहुल गांधी ने कहा कि शुरूआत में 15 दिन पहले हमारी स्थिति थी कि गृह मंत्रालय से पैलेट गन्स चलाने का, कील वाली लाठी चलाने का आदेश आया था। पूरे देश ने देखा कि हमारे छात्रों को मारा गया... हमारी पहली मांग थी कि गृह मंत्री आएं और देश को साफ तौर पर बता दें या उन्होंने आदेश दिया और वे दोषी हैं कि हमारे छात्रों पर गोली चलाई गई या फिर उन्हें जानकारी नहीं थी और किसी और ने ये आदेश दे दिया और फिर वे अयोग्य हैं। हमारा कहना था कि इस पर उन्हें सदन में आकर बयान देना चाहिए।

इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि 20 जुलाई को संसद का सत्र प्रारंभ होने के पहले दिन से ही विपक्ष ने सुदृढ़ता से अपनी मांगें रखी हैं। पहली मांग हमारी यही है कि केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली पुलिस के द्वारा जो अत्याचार हुआ, पैलेट गन्स चली, आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज हुआ... हम चाहते थे कि उस पर चर्चा हो और वे (अमित शाह) सदन में आएं। हम इसपर चर्चा चाहते हैं लेकिन उन्होंने 14-15 दिनों तक इस विषय पर कुछ नहीं कहा। इसका अर्थ है कि वे नहीं चाहते थे कि चर्चा हो।

खड़गे ने कहा कि हम दबाव बनाते रहे लेकिन वे नहीं आए। हमारी दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री ने जो राम मंदिर के ट्रस्ट की स्थापना की, उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य चुने, ट्रस्ट को चलाने की प्रक्रिया भी बताई। राम मंदिर में जिन लोगों ने चोरी की है, उन्हें सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को इसका खुलासा करना चाहिए लेकिन इस मांग पर भी ध्यान नहीं दिया गया।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि शाह सदन में विस्तार से जवाब देंगे लेकिन विपक्ष को भरोसा देना होगा कि वह बहस से भागेगा नहीं। उन्हें गृहमंत्री का जवाब बिना हंगामा किए सुनना पड़ेगा। हालांकि शाह कब संसद आएंगे और देश को संबोधित करेंगे, रिजिजू ने इसकी जानकारी नहीं दी है।