नई दिल्ली। दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप की संपत्तियों के अधिग्रहण का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें जेपी ग्रुप के एसेट्स के लिए अदाणी ग्रुप की ओर से पेश किए रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग की गई है।
दरअसल, अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता का दावा है कि नीलामी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा 1700 करोड़ रुपए की बोली उन्होंने लगाई थी। बावजूद इसे गलत तरीके से अडानी समूह को सौंपा जा रहा है। अग्रवाल ने रविवार को सार्वजनिक तौर पर कहा कि वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी और उसे इसके लिए लिखित पुष्टि भी मिली थी। लेकिन बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के इसे फैसले को बदल दिया गया।
हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया और कहा कि इसका फैसला उचित लीगल फोरम पर होगा। जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून 2024 में इनसॉल्वेंसी में एडमिट किया गया था। कंपनी 57,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन का डिफॉल्ट किया था। इसके लिए वेदांता और अडानी ग्रुप ने बोली लगाई थी। वेदांता ने 16,726 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी जबकि अडानी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये की थी। लेकिन अचानक फैसले को पलट दिया गया। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने अडानी को बोली को मंजूरी दी और एनसीएलटी ने भी इसे अप्रूव कर दिया।
वेदांता ने इसे एनसीएलएटी में चुनौती दी। उसका तर्क था कि चूंकि उसकी बोली ज्यादा बड़ी थी, इसलिए उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। बता दें कि जयप्रकाश एसोसिएट्स का बिजनेस रियल एस्टेट, सीमेंट, हॉस्पिटैलिटी, पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर तक फैला है। इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स और जेवर एयरपोर्ट के करीब जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।