ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब शायद विराम लग सकता है। युद्ध के 12वें दिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पहली बार खुलकर युद्धविराम की शर्तें सामने रखी हैं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दें, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दें और भविष्य में हमले न होने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दें तो संघर्ष समाप्त हो सकता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है और युद्ध जल्द खत्म हो सकता है।

रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पेजेशकियान ने कहा कि ईरान क्षेत्र में शांति चाहता है लेकिन मौजूदा युद्ध अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीति के कारण शुरू हुआ है। उनके मुताबिक, इस संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता यही है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के अधिकारों को स्वीकार करे,  युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई को रोकने के लिए मजबूत वैश्विक गारंटी दी जाए।

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इस बीच ईरान की सेना ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता अबोलफजल शेखरची ने मीडिया से बातचीत में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों या समुद्री ढांचों को निशाना बनाया तो फारस की खाड़ी के किसी भी बंदरगाह या आर्थिक केंद्र को सुरक्षित नहीं माना जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान अब तक किए गए हमलों से भी बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है।

तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में भी हालात गंभीर हो गए हैं। ईरान ने वहां लाइबेरिया के मालवाहक जहाज एक्सप्रेस रोम और थाईलैंड के जहाज मयूरी नारी को निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित जलमार्ग में प्रवेश किया था। हमले के बाद ओमान की नौसेना ने 20 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया। जबकि, तीन नाविक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। थाई नौसेना द्वारा जारी तस्वीरों में जहाज से घना काला धुआं निकलता दिखाई दिया।

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होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक इस स्ट्रेट में व्यवधान आने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। स्थिति को संभालने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपने सदस्य देशों के रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि यह केवल अस्थायी उपाय है और स्थायी समाधान तभी संभव है जब होर्मुज का मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और खुला रहे। 

दूसरी ओर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सलाहकार अली फदवी ने भी चेतावनी दी है कि उनका देश लंबे युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और इजरायल पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है और अब उनके पास लक्ष्य के तौर पर लगभग कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द बड़े कदम उठाए जाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि युद्ध जल्दी समाप्त हो सकता है।

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