भोपाल। राज्यसभा सांसद एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में जैविक कपास (Organic Cotton) के क्षेत्र में हो रही भारी अनियमितताओं और घोटाले पर गहरी चिंता जताई है। सिंह ने इस घोटाले की जांच CBI अथवा ED द्वारा कराए जाने की मांग की है।
पीएम मोदी को संबोधित पत्र में सिंह ने उल्लेख किया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा जैविक कपास उत्पादक और निर्यातक देश है, लेकिन देशभर में संचालित सैकड़ों किसान समूहों (ICS) द्वारा बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा रही है। किसानों के नाम पर बिना अनुमति के फर्जी पंजीकरण किए जा रहे हैं और उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इससे न केवल किसानों को नुकसान हुआ है बल्कि भारत सरकार को भी कर राजस्व की भारी हानि पहुंची है।
दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उनके द्वारा पूर्व में उठाए गए मुद्दों के बाद मध्य प्रदेश के धार जिले के भीलकुंडा गाँव में एक किसान समूह (ICS) के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। परंतु यह समस्या सिर्फ एक क्षेत्र की नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर फैली हुई है। एपीडा (APEDA) की जाँच में ही सैकड़ों ICS समूह दोषी पाए गए, जिनमें से कई को निलंबित या समाप्त किया गया, लेकिन बाद में कुछ को रहस्यमय तरीके से बहाल कर दिया गया और फिर अचानक दोबारा समाप्त कर दिया गया।
सिंह ने यह भी कहा कि अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और GOTS जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत की जैविक साख पर सवाल उठाते हुए कई प्रतिबंध लगाए हैं और मान्यताएँ रद्द की हैं, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुँची है।
सिंह ने निम्नलिखित पाँच प्रमुख माँगें की हैं:
1. जैविक कपास घोटाले की निष्पक्ष जाँच के लिए प्रकरण को CBI या प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपा जाए।
2. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए Tracenet 2.0 प्रणाली को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
3. पिछले एक वर्ष में निलंबित या समाप्त किए गए सभी ICS समूहों पर भी भीलकुंडा की तरह आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं।
4. किसानों की पहचान और सहमति सुनिश्चित करने हेतु आधार लिंक या OTP आधारित सत्यापन प्रणाली लागू की जाए।
5. जिन किसानों को ठगा गया है उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को संबोधित इस पत्र में कहा कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितताओं का नहीं, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय साख और लाखों किसानों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर पारदर्शिता बहाल करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।