ईरान। सेंट्रल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर दिए थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इन हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपूर की मौत हो गई। हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। ईरान पर हुए इस हमले में अब तक 200 से ज्यादा लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। जबकि, 700 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार, दक्षिणी ईरान में एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से बड़ा नुकसान हुआ। इस हमले में 85 से अधिक स्कूली छात्राओं की मौत हो गई। जबकि, कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया। वहीं, अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई।

बताया जा रहा है कि इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के कम से कम 10 शहरों को निशाना बनाया। इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई को इजराइल ने ऑपरेशन लायनस रोअर नाम दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अभियान दोनों देशों की समन्वित रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और मिसाइल क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है।

हमलों के तुरंत बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई का मकसद अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइल क्षमताओं को निष्क्रिय करने और उसके मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है।

इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने व्यापक पलटवार किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इजराइल की ओर लगभग 400 मिसाइलें दागीं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। ईरान की मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात के सबसे बड़े शहर दुबई को भी लक्ष्य बनाया जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।

यह सैन्य टकराव ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। इससे पहले अमेरिकी नेतृत्व ने चेतावनी दी थी कि यदि सुरक्षा खतरे बढ़े तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ताजा घटनाक्रम ने कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है और पूरे सेंट्रल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।