सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में जनविश्वास कार्यक्रम के दौरान शराब की दुकान बंद कराने की मांग लेकर पहुंची एक महिला को अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने उसकी शिकायत पर पति के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए। महिला ने गांव में शराब की वजह से घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद बढ़ने की बात कही थी। मंत्री ने मौके पर मौजूद थाना प्रभारी को महिला की रिपोर्ट दर्ज करने और उसके पति को जेल भेजने के लिए कहा। घटना के दौरान मंच पर और आसपास मौजूद प्रशासनिक अधिकारी चुप रहे थे।
यह मामला शुक्रवार को सीहोर जिले के महोड़िया गांव में आयोजित जनविश्वास कार्यक्रम का है। वहां गांव की एक महिला अपनी पारिवारिक परेशानी लेकर पहुंची थी। उसने राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा से गांव में संचालित शराब की दुकान बंद कराने की मांग की।
महिला का कहना था कि शराब की उपलब्धता के कारण गांव के कई परिवार परेशान हैं। पुरुष शराब पीकर घर लौटते हैं और पत्नियों के साथ मारपीट करते हैं। शराब खरीदने में परिवार की कमाई खर्च होने से घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। महिला को उम्मीद थी कि मंत्री उसकी शिकायत सुनकर शराब की दुकान बंद कराने के लिए कदम उठाएंगे।
महिला की शिकायत सुनने के बाद करण सिंह वर्मा ने उसके पति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने मौके पर मौजूद थाना प्रभारी को संबोधित करते हुए कहा कि महिला की रिपोर्ट दर्ज की जाए और उसके पति को जेल में बंद किया जाए। मंत्री ने कहा, "दादा मार रहे हैं, इनकी रिपोर्ट कर दो। टीआई कहां हैं? टीआई मैडम, महिला की रिपोर्ट लिखो और दादा को बंद कर दो।"
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर जिले के अधिकारी भी मौजूद थे। हालांकि, घटनाक्रम के समय किसी अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। जानकारी के मुताबिक, महिला पुलिसकर्मी पीड़ित महिला को ही पकड़कर कार्यक्रम स्थल से बाहर ले गई।
कार्यक्रम में मौजूद एक अन्य महिला ने भी गांव में शराब की वजह से महिलाओं को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया। उसने कहा कि शराब पीने वाले पुरुषों के व्यवहार के कारण महिलाओं को सम्मान के साथ जीने में दिक्कत हो रही है। कई परिवारों में आए दिन विवाद होते हैं और महिलाओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
महिला ने गांव की बुनियादी समस्याओं का भी जिक्र किया। उसने कहा कि दूसरे गांवों से शादी करके आई महिलाओं को यहां मुश्किल परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है। गांव में शराब की दुकान बंद कराने के साथ बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उसका कहना था कि ग्रामीणों की समस्याओं पर सुनवाई नहीं हो रही है और शराब का ठेका बंद कराने की मांग भी पूरी नहीं हुई है।
ग्रामीण महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में शराब का ठेका दिन रात खुला रहता है। उनके मुताबिक, पुरुष रात में शराब पीकर घर पहुंचते हैं और महिलाओं के साथ मारपीट करते हैं। शराब के नशे में होने वाले विवादों का असर आसपास रहने वाले परिवारों पर भी पड़ता है। जिससे महिलाओं को पड़ोसियों की ओर से भी परेशानी झेलनी पड़ती है।