रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध अब तेज हो गया है। जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस प्लांट को लेकर आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने कहा है कि न्यूक्लियर प्लांट से लोगों में कैंसर फैलेगा।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा के सरई गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या सरकार कैंसर के लिए पावर प्लांट डालना चाहती है? क्या आसपास के लोगों को मारना चाहती है? सिंघार ने परियोजना की साइट बदलने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसके लिए गरीब आदिवासियों, दलितों और किसानों को उजाड़ने की तैयारी है।
सिंघार के मुताबिक प्रस्तावित बिजलीघर के लिए सरकारी जमीन के अलावा करीब 150 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से जल सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने कलेक्टर पर भी ग्रामीणों को हटाने की धमकी देने का आरोप लगाया।
सिंघार ने बिजलीघर के लिए बोरिंग की अनुमति से जुड़े पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पंचायत की अनुमति मिलने की बात कह रही है, जबकि ग्रामसभा ने अनुमति देने से इनकार किया है। उनके अनुसार, सरपंच कोमल संजय सिंह ने आयुक्त और कलेक्टर को पत्र लिखकर संबंधित दस्तावेज को फर्जी बताया है। सिंघार ने कहा, “ना मैंने साइन करी, ना मैंने एनओसी दी।” उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की।
जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत का मुद्दा उठाते हुए सिंघार ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मीडिया में महिला के चार दिन तक जल सत्याग्रह में शामिल रहने की खबरें आईं, जबकि कलेक्टर इसे सामान्य मौत बता रहे हैं।
सिंघार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि कलेक्टर गलत जानकारी दे रहे हैं और मीडिया सही तथ्य सामने ला रहा है, तो सरकार निर्णय क्यों नहीं ले पा रही। उन्होंने कहा, “क्या आप कलेक्टर की आंखों से प्रदेश चला रहे हो? क्या धृतराष्ट्र हो गए हो?" सिंघार ने प्रस्तावित स्थल के आसपास कई गांव होने का दावा करते हुए परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से तत्काल साइट बदलने की मांग की। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और जरूरत पड़ने पर अदालत भी जाएगी।