नई दिल्ली। राज्यसभा में CAPF बिल 2026 पर बहस जारी है। विपक्ष इसे वापस लेने या सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग कर रहा है। बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि हम इस बिल के पक्ष में नहीं है, इसलिए इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चर्चा के दौरान सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 1 अप्रैल को "कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट" का केस लगा हुआ है। ऐसे में आखिर क्या कारण है जो अभी इस बिल को पास कराया जा रहा है?

दिग्विजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा, 'आज सदन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक- 2026 पर चर्चा हो रही है, लेकिन यह विधेयक किसी भी तरह से सुधारात्मक कदम नहीं है। बल्कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को प्रभावहीन बनाने के लिए है। साथ ही CISF, CRPF, BSF, ITBP, SSB के काडर व अधिकारियों के साथ हो रहे प्रणालीगत अन्याय को बनाए रखने का सुनियोजित विधायी प्रयास है, जिसे समाप्त करने की कोशिश सुप्रीम कोर्ट ने की थी।'

राज्यसभा सांसद ने कहा कि इन बलों में ज्यादातर अधिकारी वे हैं, जो डिप्टी कमांडेंट पद पर भर्ती हुए, अब उन्हीं पदों से रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि कोई भी डिप्टी कमांडेंट, DG क्यों नहीं बन सकता? सेना में भी अग्निवीर जैसी व्यवस्था लाई गई। अगर देश में स्थिति ऐसी रहेगी तो सेनाओं और सशस्त्र बलों में जवान किस इंटेंशन के साथ भर्ती होना चाहेंगे।

सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि BJP सरकार आज उस वर्ग से अन्याय कर रही है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान तक देने की हिम्मत रखते हैं। इसलिए मेरी मांग है कि इस बिल को वापस लिया जाए। दरअसल, ये पूरा विवाद सीएपीएफ बनाम आईपीएस का है। सीएपीएफ में दो तरह के अधिकारी होते हैं। पहले- IPS यानी इंडियन पुलिस सर्विस के अधिकारी। इन्हें सरकार डेप्युटेशन पर कुछ समय के लिए सीएपीएफ में भेजती है। और दूसरे- कैडर अधिकारी जो सीएपीएफ में सीधे भर्ती होते हैं। कैडर अधिकारियों की भर्ती UPSC की ओर से आयोजित CAPF (AC) एग्जाम के जरिए होती है।

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी जड़ 'प्रमोशन' है. एक IPS अधिकारी आमतौर पर 13-14 साल की सेवा में DIG रैंक तक पहुच जाता है। वहीं, CAPF के कैडर अधिकारी को उसी DIG रैंक तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं। डेटा के मुताबिक, CRPF और BSF जैसे बलों में लगभग 60% से ज्यादा कैडर अधिकारी असिस्टेंट कमांडेंट (AC) के पद पर भर्ती होने के बाद 10-12 साल तक उसी रैंक पर बने रहते हैं, जबकि IPS इसी दौरान दो प्रमोशन पा चुके होते हैं। प्रमोशन के इंतजार में CAPF के कैडर अधिकारी सालों गुजार देते हैं।

IPS अधिकारियों की नियुक्ति से CAPF में कैडर अधिकारियों का प्रमोशन लगभग ठहर सा गया है। 15-15 सालों से अधिकारी अपने पहले प्रमोशन का इंतजार ही कर रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि शीर्ष पदों पर IPS का कोटा कम किया जाए ताकि कैडर अधिकारियों का मनोबल न गिरे। इस कोटा को सुप्रीम कोर्ट ने 2 साल के अंदर धीरे-धीरे कम करने का आदेश दिया था। कोर्ट का मकसद था कि CAPF के अपने अधिकारियों को ज्यादा मौके मिलें। लेकिन सरकार अब बया बिल लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रभावहीन बनाने की तैयारी में है।