नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए कड़े साइबर सुरक्षा नियम लागू कर दिए हैं। अब वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे ऐप्स तभी चल पाएंगे जब फोन में यूजर की वही रजिस्टर्ड और एक्टिव SIM लगी हो। यानी SIM हटते ही सभी मैसेजिंग ऐप तुरंत बंद हो जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह सिस्टम साइबर फ्रॉड, स्पैम और फर्जी पहचान वाले मामलों को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे।
दूरसंचार विभाग ने नए आदेश में साफ कहा है कि कंपनियों को SIM बाइंडिंग सिस्टम लागू करना होगा। अभी तक मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ इंस्टॉलेशन के समय मोबाइल नंबर का वेरिफिकेशन करते थे। बाद में SIM हट जाने या नंबर बंद होने पर भी ऐप इंटरनेट मिलने पर चलता रहता था। लेकिन अब नंबर बंद हुआ तो ऐप भी बंद हो जाएंगे। यूजर्स को उसे दोबारा चलाने के लिए नंबर रिएक्टिवेट कराना या नया नंबर लेकर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा।
नियम लैपटॉप-डेस्कटॉप पर लॉगिन के तरीके को भी बदल देगा। अब तक वेब सेशन एक बार QR कोड स्कैन करने के बाद लगातार चलता रहता था चाहे फोन में SIM हो या न हो। नए नियम के बाद हर छह घंटे में वेब यूजर्स का ऑटो-लॉगआउट होगा और QR कोड स्कैन कर फिर से लॉगिन करना पड़ेगा। साथ ही वेब सेशन तभी चलता रहेगा जब फोन में सक्रिय SIM मौजूद हो। SIM हटते ही मोबाइल और कंप्यूटर दोनों पर ऐप तुरंत बंद हो जाएगा।
सरकार ने यह बदलाव इसलिए किए हैं क्योंकि कई साइबर अपराधी देश के बाहर से फर्जी नंबरों और बिना SIM वाले ऐप्स का इस्तेमाल करके ठगी, स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज भेज रहे थे। SIM बाइंडिंग से इन गतिविधियों पर रोक लगाने की उम्मीद है। इससे पहचान छुपाकर मैसेजिंग सर्विसेज चलाना मुश्किल हो जाएगा।
नए नियम का असर सिर्फ वॉट्सऐप या टेलीग्राम पर नहीं बल्कि उन सभी ऐप्स पर पड़ेगा जो मोबाइल नंबर आधारित वेरिफिकेशन से चलते हैं। इसमें सिग्नल, आईमैसेज, ट्रूकॉलर, फेसबुक-इंस्टाग्राम के OTP लिंक्ड अकाउंट्स, गूगल/एप्पल आईडी का मोबाइल-रिकवरी सिस्टम और सभी UPI ऐप शामिल हैं। यानी कोई भी ऐसा ऐप जो फोन नंबर से जुड़ा है उसे अब एक्टिव SIM की जरूरत होगी।
केंद्र सरकार ने इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया है। कंपनियों को SIM-टु-डिवाइस बाइंडिंग लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। जबकि, 120 दिनों के भीतर उन्हें अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।