नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले में रुपए में सोमवार को दोपहर के बाद जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के पार पहुंच गया। भारतीय मुद्रा इतिहास में यह सबसे बड़ी गिरावट है। माना जा रहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के माहौल के कारण घरेलू मुद्रा दबाव में है।
रुपये ने सोमवार को बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन बाद में इसने शुरुआती लाभ गंवा दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और फिर 93.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद स्तर से 128 पैसे की बढ़त दर्शाता है।
यह बढ़त हालांकि बरकरार नहीं रह सकी और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दिन के कारोबार में 95.22 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 89 पैसे की भारी गिरावट के साथ 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
रुपए के कमजोर होने से अब विदेश से आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी। यानी अब कच्चे तेल के लिए भारत को अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इतना ही नहीं मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स, जिनके पार्ट्स विदेश से आते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। माल ढुलाई भी महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल आ सकता है।