भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रदेश में सामने आए विभिन्न मामलों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सामने आए अनेक प्रकरण गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं और सरकार को इन पर स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए।
दिग्विजय सिंह सोमवार को बड़वानी जिले के ग्राम तलून स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर में भव्य मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव और 21 कुण्डीय महायज्ञ का शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सर्वोपरि है और जनता से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण विषय पर पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में रेत के अवैध खनन, अवैध शराब कारोबार, कृषि भूमि के दुरूपयोग (लैंड यूज परिवर्तन) तथा सड़क निर्माण से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि भूमि का लैंड यूज परिवर्तन मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है और यदि इन प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
वीर भारत न्यास वाले मामले पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि एक ट्रस्ट को भूमि आवंटन संबंधी मामले में उन्होंने उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण कराया। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर दिए गए एक बयान के संबंध में उन्होंने कहा कि बाद में दस्तावेजों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित न्यास एक सरकारी ट्रस्ट है, जिसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री तथा उपाध्यक्ष संस्कृति मंत्री होते हैं। इसलिए उस विषय में तथ्य स्पष्ट होने के बाद उन्होंने अपनी स्थिति भी स्पष्ट कर दी।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद देश के अनेक धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों के संचालन को लेकर जवाबदेही से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस की वित्तीय पारदर्शिता पर उन्होंने पूर्व में भी प्रश्न उठाए हैं तथा इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।
उन्होंने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त चंदे एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार पदाधिकारियों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे विधि विशेषज्ञों से परामर्श ले रहे हैं और आवश्यक हुआ तो जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस का मत स्पष्ट है कि देश के सभी धर्मों, समाजों और संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद एवं सहमति बनने के बाद ही इस विषय पर आगे बढ़ा जाना चाहिए। बिना व्यापक विचार-विमर्श के यूसीसी लागू करना उचित नहीं होगा।