इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने अब तक 31 लोगों की जान ले ली है। शुक्रवार शाम 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी। वे इस हादसे में सबसे लंबे समय तक इलाजरत रहे थे। उनकी मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। फिलहाल चार मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनमें दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है। जबकि, एक मरीज वेंटिलेटर पर है।
इस घटना में 450 से अधिक लोग बीमार हुए थे। हालांकि, अब क्षेत्र में डायरिया के मामलों में कमी आई है लेकिन कुछ मरीजों की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। इससे पहले इलाज के दौरान हेमंत गायकवाड़ की मौत हुई थी। अब उनकी 82 वर्षीय मां सुशीलाबाई की हालत गंभीर है। शुक्रवार को उन्हें सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
घटना के बाद शहर की जल और ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इन्हीं चिंताओं के बीच गुरुवार को सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक हुई। बैठक में यह फैसला लिया गया कि शहर में ड्रेनेज और पेयजल लाइनों की मॉनीटरिंग को और अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाएगा। इसके तहत नई और पुरानी सभी ड्रेनेज एवं पेयजल लाइनों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। ताकि भविष्य में कहीं भी ड्रेनेज और पेयजल लाइनों का आपसी मिश्रण न हो पाए।
बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अमृत योजना पैकेज-1, अमृत योजना 2.0 और जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रहे कार्यों पर चर्चा हुई। सांसद लालवानी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अमृत योजना 2.0 के तहत डाली जा रही सभी नई जल और ड्रेनेज लाइनों की जीआईएस मैपिंग अनिवार्य रूप से की जाए। साथ ही पुरानी लाइनों की भी मैपिंग कर उन्हें नई लाइनों के साथ सुपर इम्पोज किया जाए। ताकि भविष्य में लाइन टूटने, टकराव या रिसाव जैसी स्थितियों से बचा जा सके।
इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। हैंडपंप और बोरिंग के पानी की नियमित जांच को जरूरी बताया गया। वहीं, शहरी इलाकों में विभिन्न क्षेत्रों से रैंडम आधार पर जल सैंपल लेकर गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने ड्रेनेज और पेयजल से जुड़े कार्यों को तय समय सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी खुदाई की जाए वहां काम खत्म होते ही तुरंत गड्ढे भरने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा वैध कॉलोनियों में एसटीपी के संचालन और उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन के तहत प्रभावी कार्य किए गए हैं। आने वाले ग्रीष्मकाल को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए कि जल जीवन मिशन की टंकियों के स्रोतों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए और सभी गांवों तक नर्मदा जल पहुंचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।