भोपाल। राजधानी भोपाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर बड़ी और संवेदनशील स्थिति सामने आई है। सात विधानसभा क्षेत्रों में अब तक 10,143 आपत्तियां दर्ज की गई हैं जिनमें मतदाता नाम हटाने के लिए फार्म-7 जमा किए गए हैं। हाल ही में यह तथ्य उजागर हुआ कि कुछ मामलों में गलत या भ्रामक जानकारी देकर नाम कटवाने के प्रयास किए गए हैं। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है।
अब जिले में फार्म-7 से जुड़ी सभी आपत्तियों का बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और एआरओ (असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन ने साफ किया है कि बिना जांच के किसी का भी नाम नहीं हटाया जाएगा।
यह जानकारी शुक्रवार को आयोजित जिला स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सामने आई है। बैठक की अध्यक्षता विशेष रोल पर्यवेक्षक श्रुति सिंह ने की। इस बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, अपर कलेक्टर सुमित कुमार पांडेय, उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता, सभी एसडीएम, तहसीलदार और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक में जिले में चल रहे एसआईआर की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
विशेष रोल पर्यवेक्षक श्रुति सिंह ने बताया कि बैठक के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से एसआईआर को लेकर सुझाव और फीडबैक लिया गया है। उन्होंने कहा कि शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है। यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे। इसके लिए निर्वाचन अधिकारी, कर्मचारी और राजनीतिक दलों को मिलकर नागरिकों को जागरूक करना होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एसआईआर की विस्तृत स्थिति साझा करते हुए बताया कि 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं की सूची फ्रीज की गई थी। एसआईआर के प्रथम चरण में दो हजार से अधिक बीएलओ द्वारा साल 2003 की मतदाता सूची से लिंक के आधार पर 16 लाख 87 हजार मतदाताओं का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में 1 लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग और 46 हजार 462 मतदाता एएसडी (अब्सेंट, शिफ्टेड, डेड) श्रेणी में पाए गए।
एसआईआर के द्वितीय चरण में नो मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर उनकी जांच की जा रही है। अब तक लगभग 32 हजार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही 42 हजार से अधिक प्रकरणों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और करीब 36 हजार मतदाताओं का सत्यापन किया जा चुका है।
द्वितीय चरण के तहत जिले में अब तक नाम जोड़ने के लिए 80,892 फार्म-6, संशोधन के लिए 47,493 फार्म-8 और नाम हटाने के लिए 10,143 फार्म-7 प्राप्त हुए हैं। इस तरह कुल 1 लाख 38 हजार 528 आवेदन दावा आपत्ति प्रक्रिया में दर्ज किए गए हैं।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि जिले में फिलहाल दावा आपत्ति की सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। फार्म-7 के जरिए आए सभी मामलों में पहले भौतिक सत्यापन किया जा रहा है और सत्यापन के बाद ही नाम हटाने पर फैसला लिया जाएगा।
विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 31,840 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जबकि, नरेला में फार्म-7 की संख्या 4,963 दर्ज की गई है। जिले की सभी सात विधानसभा क्षेत्रों से मिले आंकड़े प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं और इन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।