इंदौर। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष अब भोजशाला परिसर में नमाज नहीं पढ़ सकेंगे।

इंदौर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिए फैसले ने परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार और ASI यह फैसला लें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा। अदालत के इस फैसले के बाद धार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। पूरे शहर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। एसटीएफ समेत करीब 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट में 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे गलत बताया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। बता दें कि 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद तैयार रिपोर्ट में कई अहम बातें सामने आईं। रिपोर्ट में बताया गया कि खुदाई के दौरान मूर्तियां, सिक्के और कई ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। इसमें यह भी कहा गया कि परमारकालीन भवन की नींव के पत्थरों पर बाद में निर्माण किया गया। साथ ही सर्वे में मिले स्तंभों और वास्तुकला से संकेत मिलता है कि ये पहले मंदिर का हिस्सा रहे होंगे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण में इस्तेमाल किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार परिसर में चारों दिशाओं में 106 खड़े और 82 आड़े स्तंभ मिले, यानी कुल 188 स्तंभ पाए गए। इन स्तंभों की बनावट से यह संकेत मिलता है कि वे मूल रूप से मंदिर स्थापत्य का हिस्सा थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन स्तंभों पर बनी देवी-देवताओं और मानव आकृतियों को बाद में औजारों से नुकसान पहुंचाया गया था। धार-भोजशाला मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। 

अधिवक्ता जैन के मुताबिक न्यायालय ने यह भी कहा है कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है। एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। अब से वहां केवल हिंदू पूजा-अर्चना ही होगी।