देशभर में विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। अब यह परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया गया था। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद NTA ने रीएग्जाम का फैसला लिया है।

इस साल नीट यूजी परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में कराई गई थी। परीक्षा के लिए 5400 से अधिक केंद्र बनाए गए थे और करीब 22.79 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था। परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आने लगे। जिसके बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

NTA ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को नया आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। एजेंसी ने यह भी बताया कि पहले जमा की गई फीस वापस की जाएगी और उम्मीदवारों के परीक्षा केंद्रों में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नए एडमिट कार्ड कब जारी होंगे इसकी जानकारी जल्द साझा की जाएगी।

इसी बीच गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में परीक्षा रद्द होने के बाद की स्थिति और दोबारा परीक्षा कराने की तैयारियों पर चर्चा की गई। बताया गया कि मंत्री इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।

पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। अहमदाबाद में NSUI कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश की और काले झंडे दिखाए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

CBI ने जांच के दौरान अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने पांच आरोपियों को सात दिन की कस्टडी में भेजा है। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के सीकर निवासी मांगी लाल बिंवाल, जमवारामगढ़ के दिनेश बिंवाल और उसका बेटा विकास बिंवाल, हरियाणा के गुरुग्राम निवासी यश यादव और नासिक का शुभम खैरनार शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, शुभम ने ही यश यादव को पेपर उपलब्ध कराया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र यश यादव के जरिए राजस्थान के सीकर तक पहुंचाया गया था। जानकारी के मुताबिक, छात्रों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर 2 लाख से 5 लाख रुपए तक वसूले गए थे। CBI को यह जानकारी भी मिली है कि आरोपी दिनेश बिंवाल ने प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी को स्कैन कर पीडीएफ तैयार की थी। जिसे बाद में छात्रों तक पहुंचाया गया था।

जानकारी के अनुसार, प्रश्नपत्र को पहले हाथ से लिखा गया और फिर स्कैन करके सीकर के कुछ कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक भेजा गया। 3 मई की रात सीकर में एक कोचिंग सेंटर शिक्षक और पीजी संचालक के पास जो वायरल गेस पेपर मिला था उसमें मूल प्रश्नपत्र के 180 में से करीब 150 सवाल हूबहू पाए गए थे।

दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भी खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि वह पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना था। आरोप है कि गिरोह मेडिकल कॉलेजों में MBBS एडमिशन दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से 20 से 30 लाख रुपए तक की मांग करता था। इस मामले में एक डॉक्टर को भी गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर परीक्षा को न्यायालय की निगरानी में दोबारा कराने की मांग की है। संगठन ने NTA की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एजेंसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।