नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन ने 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में सार्वजनिक महाभियोग का प्रस्ताव पारित किया। गठबंधन के सांसदों और नागरिकों की ओर से पारित इस प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी, मतदाता सूची में हेरफेर, SIR के जरिए करोड़ों मतदाताओं के नाम काटने और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता से समझौता करने समेत छह गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रस्ताव में उनके खिलाफ कानूनी सुरक्षा तत्काल समाप्त करने और संविधान के तहत न्यायालय में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की गई है।
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर यह मॉक पार्लियामेंट हुई। पूर्व स्पीकर मीरा कुमार इस मॉक संसद की अध्यक्षता कर रही थीं। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे द्वारा लाए गए प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 में निहित सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार देश के लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों से इस अधिकार पर गंभीर खतरा पैदा हुआ है। INDIA गठबंधन ने दावा किया कि उसके सांसद देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह प्रस्ताव लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ पारित किया गया है।
प्रस्ताव के पहले आरोप में ज्ञानेश कुमार पर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट चोरी की कथित साजिश को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया कि भाजपा को मतदाता सूचियों तक पहुंच देकर अपनी मर्जी से मतदाताओं के नाम जुड़वाने और कटवाने तथा चुनाव परिणामों में हेरफेर करने की अनुमति दी गई। गठबंधन ने इसे कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सुनियोजित हमला बताया है।
दूसरे आरोप में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को निशाने पर लिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, SIR के तहत 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए, जिससे वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो गए। गठबंधन ने इस पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण, अपारदर्शी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला बताया है।
तीसरे आरोप में निर्वाचन नियम, 1960 के फॉर्म-6 में कथित गैरकानूनी संशोधन का मुद्दा उठाया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि संसद की निगरानी और जानकारी के बिना किए गए इन बदलावों से पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों के पंजीकरण में बाधाएं पैदा हुईं और उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित किया गया।
चौथे आरोप में ERONET और ECINET सॉफ्टवेयर के कथित दुरुपयोग का जिक्र है। गठबंधन का आरोप है कि इन सॉफ्टवेयर के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने से रोकने की प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित किया गया। इससे स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के अधिकार प्रभावित हुए और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया गया।
पांचवें आरोप में मुख्य चुनाव आयुक्त पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, इस मामले में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आधिकारिक रिकॉर्ड में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। INDIA गठबंधन ने इसे निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन बताया है।
छठे आरोप में ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति आज्ञाकारी होने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि उन्होंने विपक्षी नेताओं की बात सुनने से इनकार किया और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से अयोग्य घोषित किए जाने, चुनाव लड़ने से रोके जाने और उनके कार्यालय के बाहर मारपीट की घटनाओं पर भी निर्वाचन आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार के परिवार के सदस्यों को प्रतिष्ठित पदों पर नियुक्तियां और आर्थिक लाभ मिलने का आरोप लगाते हुए इसे सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति उनकी कथित निष्ठा से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संवैधानिक दायित्वों के विपरीत काम करने का आरोप भी लगाया गया है।
प्रस्ताव के अंत में दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को दी गई कानूनी सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं। INDIA गठबंधन ने आरोप लगाया कि इस सुरक्षा का इस्तेमाल उनके कथित आपराधिक कृत्यों को संरक्षण देने के लिए किया जा रहा है। गठबंधन ने कानूनी सुरक्षा तत्काल समाप्त करने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संविधान के तहत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अनुसार न्यायालय में मुकदमा चलाने की मांग की है।