प्रदेश में एसआईआर के काम के बीच कलेक्टर के तबादले पर चुनाव आयोग की रोक है लेकिन राज्य सरकार ने बुधवार रात को आदेश जारी कर अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह को हटा दिया है। उनके स्थान पर 2014 बैच के ही आईएएस साकेत मालवीय को अशोकनगर का नया कलेक्टर बनाया गया है। देर रात जारी आदेश ने सभी को चौंका दिया क्योंकि आदित्य सिंह के काम को अच्छा बता कर उनके समर्थन में अशोकनगर में मुहिम चलाई जा रही थी। हर दिन साइकिल से मैदान भ्रमण करने वाले तथा प्रदेश में सबसे पहले अशोकनगर में एसआईआर का 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन करने वाले कलेक्टर के रूप में उनके काम को सहारा गया था।
चर्चा है कि आनंदपुर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने दिल्ली में बीजेपी हाई कमान से अशोकनगर के तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह की शिकायत की थी। इस कथित शिकायत में कहा गया था कि आनंदपुर साहिब की जमीन के नामांतरण मामले में 3 करोड़ की रिश्वत मांगी गई है। हालांकि, आनदंपुर ट्रस्ट की ओर से तबादले के बाद जारी वीडियो में ऐसी किसी भी शिकायत से इंकार किया गया है।
मगर इस पूरी प्रक्रिया में टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक सर्जरी यूं तो सामान्य प्रक्रिया है और अशोकनगर के कलेक्टर का तबादला इसी प्रक्रिया का हिस्सा है मगर आनंदपुर ट्रस्ट की जमीन के नामांतरण के एवज में तीन करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए जाना। इसी समय भोपाल में कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आनंदपुर ट्रस्ट पर देह व्यापार, उत्पीड़न, जमीनें हड़पने के आरोप लगाए। शाम को ही अशोकनगर में एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई जिसमें नए कलेक्टर के नाम का संकेत किया गया था। हुआ भी ऐसा ही। जारी आदेश में वही आईएएस नए कलेक्टर बनाए गए जिनके बारे में सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई थी। जबकि सरकार ने तीन नाम चुनाव आयोग भेजे थे और वहां से अनुमति के बाद आदेश जारी हुआ।
यह संयोग हो सकता है कि पत्रकार का कयास सच साबित हो जाए लेकिन अशोकनगर में इस संयोग को शंका की दृष्टि से देखा जा रहा है। सोशल मीडिया में ही संदेह के साथ सवाल उठ रहे हैं कि जिस समय ट्रस्ट द्वारा कलेक्टर पर आरोप की बातें चल रही थीं, उसी समय भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद ट्रस्ट पर आरोप लगाए जा रहे थे। जब सरकार आईएएस के तबादले का मन बना रही थी, उसी समय सोशल मीडिया में नए कलेक्टर का नाम घोषित किया जा रहा था। संदेह तो यह भी कहा गया कि नामांतरण के लिए मांगी गई राशि पार्टी फंड के लिए थी। इसमें कलेक्टर को निर्दोष बताते हुए उनके समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट की जा रही थी।
यह सब संयोग नहीं हो सकता है। अब मांग उठ रही है कि ट्रस्ट की भी जांच होनी चाहिए तथा उन आईएएस पर भी शिकंजा कसा जाना चाहिए, जिन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगे थे।
दामाद आईएएस की बार-बार बदल रही कुर्सी, पूर्व मंत्री असहाय
मध्य प्रदेश के एक कद्दावर पूर्व मंत्री के रिश्तेदार आईएएस श्रीमन शुक्ला की कुर्सी बार-बार बदल रही है। पर्यावरण विभाग में सिया के पूर्व चेयरमैन द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों में एक नाम श्रीमन शुक्ला का भी था। अब विभाग में खटपट के चलते उन्हें आयुक्त, आदिवासी विकास के पद से हटा कर योजना, आर्थिकी और सांख्यिकी विभाग में भेज दिया गया है। इस पोस्ट को लूप लाइन की पोस्ट माना जाता है।
2007 बैच के आईएएस श्रीमन शुक्ला को लोकसभा चुनाव 2024 की आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले इसी लूप लाइन वाली पोस्ट पर भेजा गया था लेकिन तब ट्रांसफर लेटर 15 घंटों बाद ही बदल दिया गया और उन्हें नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। माना गया कि पूर्व गृहमंत्री के दामाद होने के कारण दबाव में उनका तबादला आदेश बदला गया था। इस बार सरकार ने उन्हें लूप लाइन में भेजा है और इस बार तबादला आदेश निरस्त नहीं हुआ है।
हालांकि, आईएएस श्रीमन शुक्ला दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं लेकिन लंबे समय से उनके आवेदन पर विचार नहीं हो रहा है। तय माना जा रहा है कि ताजा फेरबदल के बाद अब एक बार फिर वे दिल्ली जाने के लिए जोर लगाएंगे।
जहरीला पानी: आईएएस की सजा 16 दिन में खत्म
इंदौर में भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौत का सिलसिला जारी है। मृतकों का आंकड़ा 30 तक जा पहुंचा है। इस मामले पर राजनीति बहुत हुई लेकिन जनप्रतिनिधि और अफसर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। लिहाजा, कोई दोषी नहीं पाया गया, किसी को भी इन मौत का जिम्मेदार मान कर कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे मामले में सरकार ने निगम आयुक्त आईएएस दिलीप कुमार यादव को लापरवाही का दोषी मानते हुए हटाया था। लेकिन यदि इंदौर नगर निगम आयुक्त पद से हटाया जाना ही उनकी सजा थी तो यह सजा 16 दिन में ही पूरी हो गई।
इंदौर निगम आयुक्त पद से हटाए गए आईएएस दिलीप कुमार यादव को सरकार ने उप सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से ज्यादा प्रमुख पद प्रबंध संचालक पर्यटन विकास निगम नियुक्त कर दिया। यानी, 30 लोगों की मौत का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया अधिकारी मात्र 16 दिन बाद बेहतर पद पर भेज दिया गया।
इस तबादला आदेश में सरकार ने स्वास्थ्य विभाग से दो आईएएस स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी और उप सचिव मलिका निगम नागर को हटा है। हालांकि, उन्हें भी लूप लाइन में भेजने की जगह अच्छी पदस्थापना ही दी गई है। माना जा रहा है कि ये तबादले स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर मिल रही प्रतिक्रियाओं के बाद किए गए। जाहिर है, सरकार का इरादा सजा देने का नहीं बल्कि गर्म माहौल को शांत करने का था।
आईपीएस राजा बाबू पहले गीता क्या ज्ञान, फिर नर्मदा का फेरा
मध्य प्रदेश के सीनियर आईपीएस राजा बाबू सिंह इन दिनों फिर चर्चा में हैं। गणतंत्र दिवस पर उन्होंने सीहोर के एक मदरसे के छात्रों से कुरान के साथ भगवद गीता पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि मदरसे के विद्यार्थी कुरान के साथ-साथ भगवद गीता का भी अध्ययन करें क्योंकि ये सदियों से ज्ञान देती आ रही है और उनकी जिंदगी की राह रोशन करेगी। उनके इस कहे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
लेकिन उनके लिए यह विवाद नई बात नहीं है। वे जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहे थे तब एक ईंट लेकर दिसंबर 1992 में अयोध्या गए थे। 2019 में ग्वालियर रेंज के डीआईजी रहते हुए उन्होंने जेलों में कैदियों को गीता की प्रतियां बांटी थी ताकि कैदियों में नैतिक सुधार आए।
राजा बाबू सिंह पुलिस ट्रेनिंग में धार्मिक ग्रंथों को शामिल करने के लिए जाने जाते हैं। मध्य प्रदेश के 8 पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में 4,000 से ज्यादा नए कांस्टेबलों की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने मचरितमानस और भगवद गीता का नियमित पाठ शुरू कराया। इसी माह एडीजी राजा बाबू सिंह ने श्री दादागुरु भगवान के साथ कुछ देर नर्मदा परिक्रमा की। पुलिस अफसर द्वारा सूट-बूट में संत के साथ नर्मदा परिक्रमा करने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई। कयास लगाए जा रहे हैं कि 2027 में रिटायर होने वाले आईपीएस राजा बाबू सिंह धर्म की इस राह पर चल कर आखिर पाना क्या चाहते हैं?