नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर मुस्लिमों को लेकर कड़वा बयान दिया है। इंदौर में एक भूमिपूजन कार्यक्रम में उन्होंने कहा है कि हमें काफिर कहते हो तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो। लाड़ली बहना का पैसा मत लो। उन्होंने यह बात ऐसे क्षेत्र में कही जहां हिंदु-मुस्लिम आबादी बराबर है। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए बचाव भी किया कि हम सबके विकास की बात करते हैं। विकास चाहते हो तो हमें वोट दो।

यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसा बयान दिया है। उन्होंने अपनी छवि कट्टर हिंदु नेता की ही बनाई है। मुस्लिमों को लेकर उन्होंने बहुत दिनों बाद ऐसा बयान दिया है। माना जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी इस छवि को फिर से धार देने की कोशिश की है तो इसका कारण प्रदेश और इंदौर की राजनीति में उनका कम होता कद है। 

बीजेपी में कैलाश विजयवर्गीय का कद कितना है, यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन मोहन सरकार में उनके कद को लगातार छोटा करने की कवायद देखी जा रही है। इंदौर की राजनीति में उनका असर कम हो रहा है। यहां तक कि कार्यक्रमों के पोस्टर-बैनर से भी उनका फोटो गायब होता है। वे नगरीय प्रशासन मंत्री हैं और उनके गृह नगर में इंदौर नगर निगम के पोस्टर-बैनर पर उनकी तस्वीर नहीं होती। 

इस बात पर उनके समर्थक पार्षद और एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा ने निगम की बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम आयुक्त से पूछा कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में नगर निगम के पोस्टरों में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का फोटो क्यों नहीं लगाया जा रहा है। जब बैठक में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया तो पार्षद मनीष शर्मा ने यही बात सोशल मीडिया पर लिखी। इन स्थितियों में यह कयास लाजमी है कि इंदौर में घट रहे अपने कद को देखते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने फिर अपनी जुबान बिगाड़ी है। 

बीजेपी के दो पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों की फजीहत

मध्यप्रदेश की राजनीति में बीजेपी के दो पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा और कैलाश जोशी का नाम उनकी राजनीतिक शैली के कारण सम्मान से लिया जाता है। इस सप्ताह दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे विवादों में फंसे। पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा के बेटे विधायक ओमप्रकाश सकलेचा का एक वीडियो वायरल हुआ। अपने क्षेत्र के एक गांव में स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन कार्यक्रम में गए थे। यहां ग्रामीणों ने सवाल कर दिया कि वादे के बाद भी सड़क तो बन नहीं रही है, अस्पताल लोग कैसे आएंगे? वादा पूरा न होने से नाराज लोगों ने विधायक ओमप्रकाश सकलेता हो घेर लिया। हंगामा होता देख विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने वोट न देने की बात कह दी। इस विवाद का वीडियो वायरल हुआ तो पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा के व्यवहार पर सवाल उठे। अपने मतदाताओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? 

दूसरी तरफ, पूर्व मंत्री दीपक जोशी का पारिवारिक विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। राजनीति के संत कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी कुछ बरस पहले बीजेपी छोड़ कर कांग्रेस में गए थे। चुनाव हारे तो फिर बीजेपी की राह ली। उनकी राजनीति लगभग खत्म है लेकिन शादियों के कारण वे विवादों से घिरे हैं। पूर्व मंत्री दीपक जोशी और उनकी पत्नी पल्लवी राज सक्सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर छवि धूमिल करने और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत पुलिस और साइबर क्राइम शाखा से की है। यह शिकायत दीपक जोशी की पूर्व पत्नी नम्रता जोशी के नाम से की गई है। दोनों के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है। बाद में दीपक जोशी ने पल्लवी राज सक्सेना से विवाह किया था। अब परिवार की कलह सड़क पर हैं और दीपक जोशी अपनी राजनीति नहीं शादियों के कारण सुर्खियां बन रहे हैं। 

सीएम के आगे इंदौर के नेताओं की चुप्पी

प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर को आसपास के जिले मिला कर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने का प्रस्ताव आया था तो इंदौरी बहुत खुश हुए थे। अब जब मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ तो इंदौर के लोग सकते में आ गए। इसका नाम उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी रखा गया है जबकि इस क्षेत्र में इंदौर का पूरा एरिया शामिल होगा और उज्जैन का करीब 40 फीसदी। 

ज्यादा हिस्सा हो कर भी इंदौर को मुख्यालय नहीं बनाया जा रहा है। मुख्यालय बनेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर उज्जैन। जनता समझ रही है, मीडिया समझ रहा है लेकिन बात-बात पर आग लगा देने का दावा करने वाले बीजेपी के नेता इस भेदभाव पर चुप हैं। 

जब मीडिया ने सवाल किए तो बीजेपी विधायक कह रहे हैं कि वे सीएम से बात करेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि वे 18 जून को मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिख कर इंदौर को मुख्यालय बनाने का आग्रह कर चुके हैं। सभी जानते हैं कि पत्र लिखा है, बात करेंगे जैसे जुमलों का राजनीति में क्या महत्व होता है? गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद नाम बदलने की संभावना न्यूनतम होती है। बीजेपी विधायक भी मुखर नहीं हो रहे हैं आखिर सीएम के आगे बोले कौन?

पटवारी की ताकत अभी जानते नहीं हो

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच जारी बयान युद्ध अलग पड़ाव पर पहुंच चुका है। मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने इंदौर के ग्राम पालिया में गोदामों का औचक निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि वेयरहाउसों में आग बुझाने के पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं मिले। ये वेयरहाउस कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के हैं। संजय नगायच के इस निरीक्षण बाद जीतू पटवारी के वेयरहाउस को ब्लैक लिस्ट करने और सब्सिडी वापस लेने की चेतावनी दी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन अधिकारियों को फोन कर अपने वेयरहाउसों से सरकारी अनाज हटाने और गोदामों को सरकारी सूची से बाहर करने को कहा। 

सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तबादलों में भ्रष्टाचार पर भी कटाक्ष किया है। राजस्व विभाग के कर्मचारी पटवारियों की बात करते करते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपनी ताकत का अहसास करवाने का प्रयास भी किया। भोपाल में 46 पटवारियों में से 24 पटवारियों के तबादला आदेश 24 घंटे में ही बदलने के मामले पर जीतू पटवारी ने कहा कि पटवारियों की ताकत को समझ लो, अगर इसको नहीं समझ पाओगे तो अंधेरे में रहोगे। जब पटवारी जमीन नापता है तो उसे पता होता कि किस पर कितना कंट्रोल रखना है।