उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय एक बार फिर अपनी परीक्षा परिणाम प्रणाली को लेकर विवादों में आ गया है। एमबीए चौथे सेमेस्टर के घोषित परिणाम में एक छात्र की मार्कशीट में उसे 1600 में से 1604 अंक दर्शा दिए गए। इसकी वजह से उसका प्रतिशत 100.25 दर्ज हो गया। वहीं, एमएससी द्वितीय सेमेस्टर के एक अन्य छात्र की मार्कशीट में प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक जोड़े बिना ही उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। दोनों मामलों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
बीते जून महीने में आयोजित एमबीए चौथे सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था। इसमें एक निजी कॉलेज के छात्र के चारों सेमेस्टर के अंक क्रमशः 431, 393, 398 और 382 दर्ज किए गए। इन अंकों का कुल योग 1604 बनता है। जबकि, मार्कशीट में अधिकतम अंक 1600 दर्शाए गए थे। इसी वजह से छात्र का परिणाम 100.25 प्रतिशत दिखाई देने लगा और मामला चर्चा का विषय बन गया।
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इसी दौरान एमएससी सेकंड सेमेस्टर के छात्र अजय सिंह गुर्जर की मार्कशीट में भी बड़ी त्रुटि सामने आई है। उनकी मार्कशीट में प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक दर्ज ही नहीं किए गए। इसके बावजूद उन्हें परीक्षा में पास कर दिया गया। इससे परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और डेटा एंट्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहले भी परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ी कई गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में रहा है। बीते कुछ सालों में फर्जी सॉल्वर के जरिए परीक्षा दिलाने, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अनियमितता, छात्रों को शून्य अंक मिलने और प्रश्नपत्रों में त्रुटियों जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
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मामले पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि एमबीए छात्र को 100 प्रतिशत से अधिक अंक नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, तकनीकी कारणों से अंतिम सेमेस्टर के अधिकतम अंक ग्रैंड टोटल में शामिल नहीं हो पाए। इसके चलते मार्कशीट में अधिकतम अंक 1600 प्रदर्शित हुए। जबकि, वास्तविक अधिकतम अंक 2100 थे।
उन्होंने बताया कि परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी की इस तकनीकी गलती को सुधार दिया गया है और संबंधित एजेंसी को चेतावनी भी जारी की गई है। कुलसचिव ने एमएससी छात्र की मार्कशीट में प्रैक्टिकल अंक दर्ज नहीं होने के मामले को भी गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे ताकि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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