नेपाल में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख मार्ग को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तिब्बत से निकलने वाली इस नदी में आई बाढ़ के कारण रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में कैलाश जाने वाले 384 यात्री संपर्क से बाहर हो गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा कारणों से काठमांडू के टूर ऑपरेटरों ने अगले 48 से 72 घंटे तक इस मार्ग से सभी यात्राएं रोक दी हैं। हालांकि, नेपाल सरकार या भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा रद्द करने का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, संपर्क से बाहर हुए यात्रियों को बुधवार को रसुवागढ़ी के रास्ते तिब्बत में प्रवेश करना था। इनमें 105 से अधिक भारतीय श्रद्धालु भी शामिल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी यात्री के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। सीमा क्षेत्र में सड़क और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने के कारण यात्रियों से संपर्क टूटने की आशंका जताई गई है। उनकी स्थिति की पुष्टि के लिए टूरिस्ट पुलिस, सरकारी एजेंसियां और सुरक्षा बल जुटे हुए हैं।

भोटे कोशी नदी में फ्लैश फ्लड सुबह करीब 8:30 बजे से 9:15 बजे के बीच आई थी। तेज बहाव अपने साथ नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी ब्रिज बहा ले गया। इसके साथ ही रसुवा क्षेत्र में कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई और फाइबर नेटवर्क तथा मोबाइल सेवाएं भी ठप हो गई। इससे रसुवागढ़ी-केरुंग मार्ग पर आवाजाही और यात्रियों से संपर्क दोनों बाधित हो गए।

बाढ़ ने केवल मितेरी ब्रिज को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि त्रिशूली नदी पर बने छह से अधिक पुल भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा पृथ्वी हाईवे के चितवन और पोखरा की ओर जाने वाले हिस्से में भी आवाजाही बाधित हुई है। यह मार्ग नेपाल का पुराना व्यापारिक और तिब्बत से जुड़ा प्रमुख तीर्थ मार्ग माना जाता है।

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने बताया कि कैलाश मानसरोवर जा रहे उनके एक समूह के कम से कम 77 यात्री तिब्बत के ग्यिरोंग स्थित एक इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद थे। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने इमिग्रेशन सेंटर की इमारत और उसके आसपास मौजूद सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें मिट्टी और पानी का तेज बहाव इमारत को घेरता दिखाई दे रहा है।

रसुवागढ़ी-केरुंग रास्ता कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निजी ऑपरेटरों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे सस्ता और लोकप्रिय मार्ग है। फिलहाल मितेरी ब्रिज के टूटने, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और संचार व्यवस्था ठप पड़ने के कारण यह पूरा रूट बंद है। नेपाल में इस साल पांच साल के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू होने के चलते करीब 25 हजार भारतीय श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद थी।

ट्रेकिंग एजेंसियों के संगठन Trekking Agencies Association of Nepal (TAAN) ने नेपाल के विदेश मंत्रालय और चीनी दूतावास से अपील की है कि यात्रियों के लिए तातोपानी, कोरोला और हिल्सा जैसे वैकल्पिक सीमा मार्ग खोले जाएं। संगठन ने इन रास्तों से यात्रा की सुविधा देने के साथ वीजा प्रक्रिया को भी आसान बनाने की मांग की है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोनों निर्धारित मार्ग फिलहाल जारी हैं। लिपुलेख पास (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) के रास्ते होने वाली यह सरकारी यात्रा नेपाल से होकर नहीं गुजरती। इसलिए नेपाल में आई बाढ़ का इस पर सीधा असर नहीं पड़ा है। जून से अगस्त 2026 के बीच इस यात्रा के लिए 50-50 श्रद्धालुओं के 10 बैच निर्धारित किए गए हैं और यह यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार चल रही है।

वहीं, नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों द्वारा कराई जा रही बड़ी संख्या में यात्राएं फिलहाल ठप हैं। काठमांडू के टूर ऑपरेटरों ने सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अगले 48 से 72 घंटे तक प्रस्थान रोकने का फैसला किया है।

अधिकारियों ने कहा है कि अभी तक यात्रियों के हताहत होने की कोई पुष्ट सूचना नहीं है। संचार नेटवर्क के बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल और भारत की संबंधित एजेंसियां यात्रियों की स्थिति का पता लगाने और उनकी सुरक्षित निकासी के विकल्प तलाशने में जुटी हैं।

भारतीय यात्रियों के परिवारों से अपील की गई है कि वे जरूरत पड़ने पर काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन और नेपाल पर्यटन बोर्ड के कंट्रोल रूम से संपर्क करें। स्थिति सामान्य होने और मार्ग सुरक्षित घोषित किए जाने तक नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा पर अनिश्चितता बनी हुई है।