उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे सड़क और ब्रिज प्रोजेक्ट में निर्माण के दौरान बड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है। इंदौर रोड से सिंहस्थ क्षेत्र को जोड़ने के लिए बनाई जा रही सड़क और शिप्रा नदी पर बन रहे पुल का अलाइनमेंट आपस में मेल नहीं खा रहा है। स्थिति यह है कि सड़क जिस दिशा में पहुंच रही है उसके बजाय ब्रिज का लैंडिंग हिस्सा खेत की ओर उतर रहा है। निर्माण काफी आगे बढ़ने के बाद सामने आई इस चूक को सुधारने के लिए अब सड़क की दिशा बदलने और किसानों से अतिरिक्त जमीन लेने की तैयारी की जा रही है।

यह पूरा प्रोजेक्ट सिंहस्थ के दौरान इंदौर और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचाने और उज्जैन शहर को भारी ट्रैफिक से राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इंदौर रोड पर एक निजी शॉपिंग मॉल के सामने से महावीर बाग मार्ग होते हुए एमआर-21 तक सड़क बनाई जा रही है। इस सड़क के निर्माण की अनुमानित लागत 23.26 करोड़ रुपये है। वहीं, शिप्रा नदी पर बन रहे पुल पर करीब 13.38 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें:कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाना मुश्किल, उमरिया में 60 से ज्यादा स्कूली बच्चे पहुंचे कलेक्टर कार्यालय

प्रोजेक्ट में सड़क निर्माण का काम नगर निगम और पुल निर्माण की जिम्मेदारी सेतु विभाग के पास है। दोनों निर्माण कार्य एक ही यातायात मार्ग का हिस्सा हैं लेकिन मौके पर इनके बीच करीब 30 डिग्री का अंतर सामने आया है। सड़क का अर्थवर्क और पुल के पिलर भी तैयार हो चुके हैं। पुल को आगे चलकर सिंकदरी और डाबरीखेड़ी गांव को जोड़ने वाले मार्ग से मिलना था लेकिन मौजूदा निर्माण में ब्रिज का रास्ता सड़क से जुड़ने के बजाय खेत की दिशा में जा रहा है।

निर्माण की यह स्थिति सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब सड़क और पुल एक ही मार्ग को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे थे तो काम शुरू करने से पहले दोनों विभागों ने संयुक्त सर्वे और तकनीकी अलाइनमेंट का मिलान क्यों नहीं किया। यदि शुरुआती स्तर पर ही यह अंतर पकड़ लिया जाता तो निर्माण आगे बढ़ने के बाद सड़क की दिशा बदलने की स्थिति नहीं बनती।

अलाइनमेंट की गड़बड़ी को ठीक करने के लिए अब सड़क को मोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए निजी जमीन की अतिरिक्त जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में किसानों और निजी प्लॉट मालिकों की जमीन प्रभावित होने की संभावना है। यानी निर्माण की शुरुआती तकनीकी चूक का असर अब जमीन अधिग्रहण के रूप में सामने आ सकता है।

यह भी पढ़ें:15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने गेंद से किया कमाल, 4 गेंद में झटके 2 विकेट

इस बायपास का उद्देश्य बदनावर, गरोठ और देवास की तरफ से आने वाले वाहनों को शहर के भीतर लाए बिना सीधे सिंहस्थ क्षेत्र तक पहुंचाना है। इंदौर-उज्जैन फोरलेन से आने वाले ट्रैफिक को भी इस वैकल्पिक मार्ग का फायदा मिलना है। बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम तेजी से चल रहे हैं। इन निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग कमिश्नर आशीष सिंह कर रहे हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत वाले एक ही ट्रैफिक कॉरिडोर के दो हिस्सों के अलाइनमेंट में इतना बड़ा अंतर सामने आने से निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय और तकनीकी जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामला केवल पुल को सड़क से जोड़ने तक सीमित नहीं है। अब गलती सुधारने के लिए सड़क का रूट बदलना पड़ा तो अतिरिक्त जमीन, समय और निर्माण लागत का मुद्दा भी सामने आ सकता है। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन से पहले प्रोजेक्ट समय पर पूरा करना जरूरी है इसलिए निर्माण के शुरुआती चरण में हुई इस चूक को जल्द दूर करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

यह भी पढ़ें:पटना में BPSC TRE-4 में बदलाव की मांग पर छात्रों का प्रदर्शन, डाकबंगला पर पुलिस से झड़प

मामले को लेकर सेतु विभाग के ईई पीएस पंत से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल बात करने की स्थिति में नहीं हैं और कॉल काट दिया। इसके बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। सड़क निर्माण से जुड़े नगर निगम की एमआईसी के आरके जैन ने भी तत्काल जवाब देने के बजाय कुछ देर बाद संपर्क करने की बात कही लेकिन बाद में उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।