भोपाल। मध्य प्रदेश में जारी SIR प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं। इसी क्रम में भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां महामाई बाग इलाके में स्थित मकान क्रमांक 70 बड़ा ही स्पेशल है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का क्षेत्रीय कार्यालय है। मतदाता सूची के मुताबिक यहां 30 वोटर्स के नाम दर्ज हैं, जो 09 अलग-अलग समुदायों के हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शनिवार को जब यहां पहुंचे तो पता चला कि सिर्फ एक व्यक्ति ही यहां रहता है। शेष 29 मतदाताओं का यह पता नहीं है। यानी ये वोटर्स संदिग्ध अथवा फर्जी हैं।
दरअसल, नरेला विधानसभा क्षेत्र के बूथ क्रमांक 189 से जुड़ी मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ी की शिकायतें प्राप्त होने पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शनिवार शाम वहां लोगों से मिलने पहुंचे थे। सिंह जब मकान संख्या 70 पर पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने बताया कि यह शिक्षक संघ का प्रांतीय कार्यालय है और आरएसएस का स्थानीय कार्यालय। वहां शिक्षक संघ और RSS के बोर्ड भी लगे हुए थे।
सिंह ने जब मतदाता सूची के नामों की मिलान करना शुरू किया, तब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। करीब 1250 वर्ग फुट के इस अकेले मकान में 30 लोगों के नाम मतदाता के रूप में दर्ज थे, लेकिन मौके पर पता चला कि इनमें से केवल एक मतदाता ही यहां रहता है। सिंह ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि शेष नाम फर्जी तरीके से दर्ज किए गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जब पूछताछ शुरू की तो वहां गौतम आर्य नामक एक अन्य व्यक्ति मिले। गौतम आर्य ने स्वयं को ग्वालियर का निवासी बताते हुए कहा कि वे आरएसएस के शाखा प्रशिक्षक कि हैसियत से यहाँ रहते हैं। यह वही जगह है जहाँ आरएसएस की अक्सर बैठकें होती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि इससे हे स्पष्ट होती है कि जहाँ आरएसएस की बैठकें हो रही हैं, वहीं इस तरह का बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। उन्होंने पूछा कि इस गंभीर धांधली का दोष किसे दिया जाए? सिंह ने कहा कि पूरी एसआईआर की प्रक्रिया ही दोषपूर्ण प्रतीत होती है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मतदाता सूची में फर्जीवाड़े और बीएलओ को एसआईआर प्रक्रिया में जिम्मेदारी सौंपे जाने पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार को दिग्विजय सिंह ने बताया था कि भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र के एक घर में वास्तविक मतदाता केवल 4 हैं, लेकिन मतदाता सूची में 108 नाम दर्ज हैं। चुनाव आयोग का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी घर में यदि 10 से ज्यादा मतदाता हैं, तो एक रिटर्निंग ऑफिसर को मौके पर जाकर सत्यापित करना चाहिए कि इस घर में 10 मतदाता हैं भी या नहीं। इसी तरह रिटर्निंग ऑफिसर की भी जिम्मेदारी आती है। इसलिए हम चुनाव आयोग से मांग करेंगे कि साल 2023 और 2025 में जो भी बीएलओ, एईआरओ और रिटर्निंग ऑफिसर रहे हैं उन सबके खिलाफ कार्रवाई शुरू करना चाहिए। इन लोगों ने फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में डाले हैं।
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा था कि मैं सचेत करना चाहता हूं बीएलओ, एईआरओ और आरओ को कि आप ये मत समझिए आप इससे बच सकते हैं। आपसे हमारी प्रार्थना है कि ईमानदारी से मतदाता सूची तैयार करिए। किसी के प्रभाव में आने की जरूरत नहीं है। भारतीय जनता पार्टी आपको बचाने नहीं आएगी। यदि आपने गलत मतदाता सूची तैयार की है, यदि हमने प्रमाणित कर दी तो आपको बचाने कोई नहीं आएगा।