इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में पूर्वी रिंग रोड परियोजना और इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। किसानों ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तेज गर्मी के बीच प्रदर्शन कर रहे एक बुजुर्ग किसान की तबीयत बिगड़ गई और वे वहीं जमीन पर लेट गया। मौके पर मौजूद सरकारी कर्मचारी पानी की बोतल लेकर पहुंचे लेकिन किसानों ने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे सरकार का पानी भी स्वीकार नहीं करेंगे और अपना पानी ही पिएंगे।

प्रदर्शन में इंदौर, महू, देवास, सांवेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से किसान शामिल हुए। महू के अलावा पिवडाय, कंपेल, जोशी गुराडिया सहित 30 से अधिक गांवों और क्षेत्रों से सैकड़ों किसान तख्तियां लेकर पहुंचे थे। तख्तियों पर लिखा था, “किसानों से उपजाऊ जमीन मत छीनो”, “खेती ही हमारा रोजगार है” और “किसानों को मत सताओ”। कई किसान अपने गले में वे सम्मान पदक और शील्ड पहनकर पहुंचे जो उन्हें कृषि उत्पादन, नवाचार और सामाजिक कार्यों के लिए पहले मिल चुके थे। उनका कहना था कि जब उन्हें सम्मानित किया गया था तब वे विकास के सहभागी माने गए थे लेकिन आज वही किसान अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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किसानों के मुताबिक, पूर्वी रिंग रोड और इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन परियोजना से करीब 44 गांव प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 1,200 किसानों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित अलाइनमेंट के तहत अति उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि ली जा रही है जहां साल में तीन से चार फसलें होती हैं। यह जमीन उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है। किसानों का कहना है कि यदि यह भूमि चली गई तो उनके परिवारों के सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा।

किसान गौतम बंटू गुर्जर ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में पहले से ही तीन-चार कनेक्टिंग रोड मौजूद हैं। इनमें आरआई-2, आरआई-3 और बाईपास शामिल हैं। उनका सवाल है कि जब पश्चिम आउटर रिंग रोड भी बन रही है और पहले से सड़कें उपलब्ध हैं तो पूर्वी रिंग रोड की क्या आवश्यकता है। किसानों का आरोप है कि उपजाऊ जमीन को छोड़कर कम उपजाऊ या बंजर क्षेत्र में सड़क बनाई जानी चाहिए। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने पूर्वी बायपास का सर्वे शुरू कर दिया है और दस से अधिक गांवों में जमीन का अधिग्रहण भी हो चुका है। करीब 70 किलोमीटर लंबा बायपास महू से मांगलिया गांव के आगे तक प्रस्तावित है। बीस साल पहले राऊ से देवास तक बायपास का निर्माण भी किया जा चुका है।

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किसानों ने यह भी कहा कि सिहंस्थ 2026 को ध्यान में रखकर जल्दबाजी में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आपत्तियों पर व्यक्तिगत सुनवाई नहीं हो रही और पुनर्वास नीति स्पष्ट नहीं की गई है। किसानों के बीच मुआवजे को लेकर भी असंतोष है। किसानों की मांग है कि जिनकी जमीन अधिग्रहित हो रही है उन्हें वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए। सभी प्रभावित किसानों को एक समान दर पर बढ़ा हुआ मुआवजा मिलना चाहिए और कृषि भूमि की गाइडलाइन दरें वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार बढ़ाई जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। उनका आरोप है कि सरकार सीमेंट और कंक्रीट का जंगल खड़ा कर रही है और भूमाफिया के लिए उपजाऊ जमीन खत्म की जा रही है। कई किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और मालवा-निमाड़ क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को इससे लाभ होता है। किसान संतोष सोनतिया ने कहा कि यदि पश्चिम आउटर रिंग रोड बन रही है तो पूर्वी रिंग रोड की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। उनका आरोप है कि मंत्री स्तर पर सहानुभूति जताई जाती है लेकिन सरकार के खिलाफ निर्णय नहीं लिया जाता।

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किसानों का यह भी कहना है कि विकास कार्यों के विरोधी वे नहीं हैं लेकिन यदि सड़क और रेल लाइन बनाना अनिवार्य है तो वर्तमान अलाइनमेंट से 5 से 6 किलोमीटर दूर निर्माण किया जाए ताकि उनकी उपजाऊ जमीन प्रभावित न हो। वे बिना किसानों की सहमति भूमि अधिग्रहण को अपने मौलिक अधिकारों का हनन मानते हैं।

प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही थी। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर रोशन राय ने बताया कि पिछले छह महीनों से किसानों से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अलाइनमेंट बदलने और गाइडलाइन से अधिक मुआवजा देने की मांगों पर विचार किया जा रहा है। जैसे वेस्टर्न रिंग रोड से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला गया वैसे ही इस मामले को भी हल करने का प्रयास किया जाएगा। जिन मुद्दों का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है उन्हें यहीं निपटाया जाएगा और जिन मामलों को सरकार के पास भेजना होगा उन्हें आगे भेजा जाएगा।

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