भोपाल। मध्य प्रदेश के बजट पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश का राजकोषीय घाटा 74 हज़ार करोड़ से ज्यादा हो गया। बजट में युवाओं को नौकरी, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर कोई बात नहीं हुई। नेता विपक्ष ने राज्य शासन से पूछा कि केंद्र सरकार से अगले पाँच साल में मिलने वाले करों की हिस्सेदारी में ₹50 हज़ार करोड़ की कमी को लेकर सरकार की रणनीति क्या है? उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता के साथ छलावा है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वित्तमंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा। जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा? यह बजट सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा है। उन्होंने आगे कहा कि किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया गया था, लेकिन बजट में इस पर कोई स्पष्ट नीति, योजना या समयसीमा नहीं है। किसान आज भी लागत और कर्ज के बोझ तले दबा है। जो MSP के वादे किए गए थे वो भी पूरे नहीं हुए।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि भर्ती, नई नौकरियों और रोजगार सृजन पर ठोस प्रावधान होंगे, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। संविदा भर्ती की बात कही गयी है इससे नौकरी पाने वाले पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

नेता विपक्ष ने कहा कि नर्मदा किनारे 5 हजार हेक्टेयर में वृक्षारोपण की बात की जा रही है। जब वित्तीय स्थिति कमजोर है तो यह योजना कैसे लागू होगी? पिछली बार भी मां नर्मदा के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ था, इस बार भी वैसी ही आशंका है।उन्होंने कहा कि बिजली की दरें कम करने पर कोई घोषणा नहीं की गई। आम जनता महंगे बिलों से परेशान है, लेकिन सरकार ने राहत देने की कोई मंशा नहीं दिखाई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि एक तरफ प्रदेश के संसाधन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं और अडानी जैसे उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं, दूसरी ओर आम जनता को बिजली बिल में राहत नहीं दी जा रही। सरकार की प्राथमिकताएं साफ हैं—जनता नहीं, उद्योगपति पहले। उन्होंने कहा कि विधायकों की मांग थी कि विधायक निधि 2 करोड़ रुपये और बढ़ायी जाए ताकि वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य करा सकें। इस मांग की अनदेखी कर सरकार ने न सिर्फ विधायकों बल्कि विधानसभा अध्यक्ष की भावना का भी अपमान किया है।

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है। इसमें झूठे आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है। प्रदेश की जनता इस छलावे को समझ चुकी है और समय आने पर जवाब देगी।