भोपाल। मध्य प्रदेश में बजट 2026-27 को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने बजट को आम जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस सरकार ने वार्षिक बजट पेश करने से एक दिन पहले ही 19287 करोड़ रूपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया हो, जिस सरकार को बजट सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 5700 करोड़ रूपये का कर्ज लेना पड़ा हो, उस सरकार के वार्षिक बजट के क्या मायने हो सकता है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि प्रदेश की बदतर होती आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 फ़रवरी तक वित्तीय वर्ष के 321 दिनों में मोहन यादव सरकार ने 17 बार कर्ज लिया है। औसतन हर 19 दिन में सरकार कर्ज लेने को बाध्य हो, जो सरकार एक माह भी बिना कर्ज लिए चलने की स्थिति में न हो, उस सरकार को बजट नहीं, स्वेतपत्र जारी कर प्रदेश की वास्तविक स्थिति जनता और विधानसभा में रखनी चाहिए।

माकपा नेता ने कहा है कि ज़ब प्रदेश पर कर्ज का बोझ 5.40 लाख करोड़ हो गया है, तब 4.38 लाख करोड़ का बजट प्रदेश की स्थिति को बयान करने के लिए काफ़ी है। राज्य सरकार ने इस राशि का बड़ा हिस्सा भी प्रदेश के प्रयटक स्थलों, होटलों और प्राकृतिक संसाधनों को बेच कर जुटाने का प्रावधान किया गया है। पूर्वजों की सम्पति को बेच कर मौज मस्ती को प्रदेश का विकास नहीं, विनाश ही कहा जायेगा। जसविंदर सिंह ने कहा कि यह बजट किसान, मजदूर, गांव, गरीब, महिला, छात्र और युवा विरोधी बजट है।