भोपाल। दलित और आदिवासी समाज से जुड़े संगठनों ने एक बार फिर साझा संघर्ष की दिशा तय करने की पहल की है। राजधानी भोपाल में हुए मंथन के बाद भोपाल डिक्लेरेशन-2 का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसमें कुल 21 अहम बिंदुओं के ज़रिये मौजूदा सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक चुनौतियों को चिन्हित किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में इस डिक्लेरेशन को जनता के बीच ले जाने की रणनीति भी तय की गई।
इन 21 बिंदुओं पर बनी सहमति
1. सुनिश्चित किया जाए कि हर ST & SC परिवार के पास आजीविका हेतु पर्याप्त खेती योग्य भूमि हो। इसके लिए अतिरिक्त भूमि (surplus land), सरकारी भूमि आवश्यकता पड़ने पर भूमि की सरकारी खरीद (state purchase of land) की जाए।
2. यह सुनिश्चित किया जाए कि गाँव एवं शहर की साझा संपत्तियों (common property resources) पर SC/ST को समान अधिकार (equal rights) प्राप्त हों। इसके लिए कड़ा क़ानून (stringent law) बनाया जाए तथा जानबूझकर लंबी कानुनी प्रक्रिया को रोका जाए।
3. यह सुनिश्चित किया जाए कि ST/SC कृषि मज़दूरों को सम्मानजनक मज़दूरी, महिला-पुरुष समान वेतन, नौकरी की सुरक्षा तथा बेहतर कार्य परिस्थितियों प्रदान की जाएँ। उल्लंघन करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
4. यह सुनिश्चित किया जाए कि केंद्र एवं राज्य स्तर पर वैधानिक समितियाँ गठित की जाएँ, जो गैर-ST/SC द्वारा कब्ज़ाई गई भूमि की पहचान करें, मुआवज़ा तय करें तथा भूमि मूल स्वामियों को लौटाई जाए। इसके लिए विशेष अदालतें स्थापित की जाएँ।
5. यह सुनिश्चित किया जाए कि आदिवासियों की छीनी गई भूमि लौटाई जाए तथा जंगल एवं वन उपज पर उनके अधिकार बहाल किए जाएँ। परियोजनाओं/बाँधों से विस्थापित ST/SC को परियोजनाओं में हिम्मेदार बनाया जाए।
6. यह सुनिश्चित किया जाए कि पूंजी व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण किया जाए, जिससे SC/ST को उनकी जनसंख्या के अनुपात में हिस्मा मिले। इसके लिए बजटीय आवंटन, निवेश संसाधन एवं कौशल विकास सुनिश्चित किया जाए।
7. यह सुनिश्चित किया जाए कि Bonded Labour Act, 1976 का सख्ती मे क्रियान्वयन किया जाए तथा बंधन एवं बाल श्रम को तत्काल समाम किया जाए। श्रम कानूनों में आवश्यक संशोधन कर freedom with dignity सुनिश्चित की जाए।
8. यह सुनिश्चित किया जाए कि संविधान के अनुच्छेद 21 में मंशोधन कर पर्याप्त जीवन-स्तर का अधिकार भोजन, मुरक्षित पेयजल, वस्त्र, आवास, सार्वजनिक स्वास्थ्य चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा- जोड़ा जाए। साथ ही living wage तथा 5 एकड़ cultivable land या gainful employment, विशेष रूप से SC/ST के लिए, सुनिश्चित किया जाए।
9. यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी ST/SC बच्चों को अनिवार्य, निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए। निरक्षरता के अनुपात में फंड आवंटन बढ़ाया जाए, छात्रवृत्ति बढ़ाई जाए तथा SC/ST विद्यालयों में बेहतर आधारभूत ढाँचा एवं vocational & technical education प्रदान की जाए।
10. यह सुनिश्चित किया जाए कि प्राथमिक में प्रोफेशनल स्तर तक सभी सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाए। सभी English medium schools में Diversity in Admissions लागू की जाए।
11. यह सुनिश्चित किया जाए कि SC/ST महिलाओं को अलग श्रेणी (distinct category) मानते हुए जनगणना एवं रिपोर्टिंग की जाए। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विशेष योजनाएँ बनाई जाएँ तथा वार्षिक विशेष अध्ययन प्रस्तुत किए जाएँ।
12. यह सुनिश्चित किया जाए किः SC/ST PoA Act, 1989 एवं Rules, 1995 का कड़ाई से अनुपालन किया जाए, विशेषकर दलित महिलाओं में जुड़े मामलों में। जातीय हिंसा भड़काने वालों तथा मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
13. यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी सार्वजनिक संस्थानों में SC/ST का समुचित प्रतिनिधित्व निश्चित किया जाए। Affirmative Action का पालन न करने वालों की मान्यता एवं सरकारी फंडिंग रोकी जाए।
14. यह सुनिश्चित किया जाए कि केंद्र एवं राज्य बजट में SC/ST आबादी के अनुपात में आवंटन किया जाए। फंड डायवर्जन या अप्रयोग (diversion/non-utilisation) पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
15. यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में Supplier Diversity तथा Dealership Diversity लागू की जाए।
16. यह सुनिश्चित किया जाए कि SC/ST की सुरक्षा की पूर्ण ज़िम्मेदारी राज्य द्वारा ली जाए। Atrocity-prone areas की पहचान कर सुरक्षा बलों की तैनाती, arms licence for self-defence, village-level self-defence groups तथा Dalit women weapon training प्रदान की जाए।
17. यह सुनिश्चित किया जाए कि manual scavenging को तत्काल समाप्त किया जाए तथा rehabilitation & sustainable employment उपलब्ध कराया जाए। 1993 Act के उल्लंघन पर, विशेषकर Railways, Defence एवं ULBS, पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
18. यह सुनिश्चित किया जाए कि संसद एवं सभी राज्य विधानसभाओं में SC/ST एवं सफाई कर्मचारी कमीशन की Annual Reports पर एक वर्ष के भीतर अनिवार्य चर्चा की जा तथा Action Taken Reports महित सभी रिपोर्ट public domain में रखी जाएँ।
19. यह सुनिश्चित किया जाए कि निजी एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र में सरकारी क्षेत्र के संख्याअनुपात में आरक्षण लागू किया जाए तथा skills & capacity building के माध्यम से job readiness विकसित की जाए।
20. यह सुनिश्चित किया जाए कि न्यायपालिका (judiciary) के सभी स्तरों पर SC/ST प्रतिनिधित्व लागू किया जाए। Appointment process को transparent बनाया जाए तथा nomination system समाप्त की जाए।
21. यह सुनिश्चित किया जाए कि पिछले 25 वर्षों में आरक्षण की स्थिति पर दो वर्षों के भीतर White Paper तैयार किया जाए तथा उसे संसद एवं विधानसभाओं में चर्चा हेतु प्रस्तुत किया जाए। Backlog posts को war footing पर केवल ST/SCउम्मीदवारों से तुरंत भरा जाए।
गौरतलब है कि साल 2002 में सामने आया भोपाल डिक्लेरेशन दलित-आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में एक अहम दस्तावेज़ माना गया था। 25 साल बाद बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में इसे नए सिरे से रिवाइव करने की ज़रूरत महसूस की गई। आयोजकों का कहना है कि आज संविधान, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार, भूमि और वन अधिकार जैसे मुद्दों पर नए सिरे से संघर्ष की ज़रूरत है। "भोपाल डिक्लेरेशन 2" इस संघर्ष को नई धार देगा।