भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर विपक्ष हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे किसानों के साथ अत्याचार बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान बिचौलियों को फसल बेच दें।
कमलनाथ ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, 'प्रदेश के किसान पर चौतरफ़ा मार पड़ रही है। गेहूं की फ़सल तैयार है लेकिन किसान उसे बेच नहीं सकता क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार वारदाने की कमी बताकर 10 अप्रैल से पहले गेहूं की ख़रीद के लिए तैयार नहीं है।दूसरी तरफ़ ओलावृष्टि के कारण बड़े पैमाने पर खेत में खड़ी और खलिहान में रखी फ़सल को नुक़सान पहुँचा है। प्रदेश के 17 ज़िलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई है।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों में फिर से बूंदाबांदी की आशंका है। गेहूं की फ़सल के सामने इस प्राकृतिक संकट के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार तत्काल गेहूं की ख़रीद शुरू नहीं कर रही है। कमलनाथ ने कहा कि असल में सरकार की नीयत में खोट है। भाजपा चाहती है कि मौसम के डर से किसान जल्दी से जल्दी बिचौलियों को कम दाम में फ़सल बेच दें और सरकार को MSP पर कम से कम गेहूं ख़रीदना पड़े।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'सच्चाई यह है कि मध्य प्रदेश के किसानों ने 160 लाख टन गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से मध्यप्रदेश में 78 लाख टन गेहूं ख़रीदने की सीमा तय की गई है। भाजपा सरकार जानबूझकर किसानों को संकट में धकेल रही है और किसानों पर अत्याचार कर रही है।' उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल MSP पर गेहूं की ख़रीद शुरू करने की मांग की है।