भोपाल। रिटायर्ड न्यायाधीश की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग खारिज कर दी है। मृतका के मायके पक्ष ने दिल्ली स्थित एम्स में शव का री पोस्टमार्टम कराने की अनुमति मांगी थी लेकिन कोर्ट ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद इस मांग को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, अदालत ने परिवार को राहत देते हुए ट्विशा के शव को मध्य प्रदेश में किसी भी सुरक्षित शवगृह में संरक्षित रखने की अनुमति दे दी है।

इस बीच मामले में फरार आरोपी पति समर्थ सिंह पर पुलिस ने शिकंजा और कस दिया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने समर्थ सिंह पर घोषित इनाम राशि 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है। समर्थ सिंह पेशे से अधिवक्ता है और उसके खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसे 23 मई को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं। कटारा हिल्स पुलिस ने यह भी साफ किया है कि यदि वह तय तारीख तक पेश नहीं हुआ तो उसके पासपोर्ट निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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ट्विशा शर्मा और समर्थ सिंह की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों की मुलाकात शादी डॉट कॉम के जरिए हुई थी। 12 मई की रात ट्विशा कटारा हिल्स स्थित घर में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी मिली थी। जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।

मृतका के परिजनों और उनके वकील अंकुर पांडे ने अदालत में दावा किया था कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई अहम तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। उनका आरोप था कि ट्विशा के शरीर पर मिले चोट के निशानों का ठीक से उल्लेख नहीं किया गया और जिस वस्तु या फंदे से वह लटकी मिली थीं। उसका भी स्पष्ट जिक्र रिपोर्ट में नहीं है। परिजनों ने आशंका जताई थी कि प्रभावशाली ससुराल पक्ष के कारण स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए शव को दिल्ली एम्स ले जाकर दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी है।

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हालांकि, अदालत ने इस मांग को कानूनी आधार पर खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद परिवार की दोबारा पोस्टमार्टम की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। इससे पहले ट्विशा के परिजनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मंत्रालय में मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा देते हुए कहा था कि राज्य सरकार मामले की सीबीआई जांच के लिए पत्र भेजेगी। साथ ही यदि परिवार चाहे तो शव को दिल्ली ले जाने के लिए सरकारी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

मामले में एक और तकनीकी चुनौती भी सामने आई है। भोपाल एम्स ने बताया कि शव को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान की आवश्यकता है। जबकि, वर्तमान में शव को माइनस 4 डिग्री तापमान में रखा गया है। ऐसी अत्याधुनिक सुविधा भोपाल में उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई जारी है।

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