ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार ब्लॉक स्थित सिरसौद गांव में रतनजोत का फल खाने के बाद 10 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चे रविवार शाम भागवत कथा और भंडारे से लौट रहे थे। रास्ते में खेत के पास रतनजोत का पौधा देखकर उन्होंने उसके फल को ड्राईफ्रूट समझ लिया और आपस में बांटकर खा लिया। कुछ देर बाद घर पहुंचने पर बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई थी।

बच्चों की हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल मुरार की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। वहां से सभी बच्चों को जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के कमला राजा अस्पताल (KRA) रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद 8 बच्चों को PICU में भर्ती किया गया। जबकि, गंभीर हालत वाले दो बच्चों हरिओम (15) और सेजल (14) को न्यू जेएएच के ICU में रखा गया है। गांव से तीन अन्य बच्चों को भी अस्पताल लाए जाने की जानकारी सामने आई है।

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KRA के PICU में पूजा (11), आरती (9), दीक्षा (12), प्रवीण (10), दिव्या (8), सुमित (8), गौरव (5) और तनु (9) का इलाज चल रहा है। वहीं, हरिओम और सेजल की स्थिति को देखते हुए उन्हें ICU में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

बच्चों के रतनजोत का फल खाने की जानकारी मिलने पर वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास कमला राजा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और उपचार कर रही मेडिकल टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। डॉक्टर के मुताबिक, रतनजोत का फल जहरीला होता है और इसके सेवन से शरीर में टॉक्सिसिटी हो सकती है। इसके कारण उल्टी दस्त के साथ डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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इस घटना के बाद जिला अस्पताल मुरार में बच्चों को प्राथमिक उपचार दिए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि बच्चों को इमरजेंसी में लाने के बाद प्राथमिक उपचार देने के बजाय सीधे KRA रेफर कर दिया गया। उनका कहना है कि बच्चों की हालत पहले से खराब थी और यदि तत्काल प्राथमिक उपचार मिलता तो उन्हें राहत मिल सकती थी। 

हालांकि, इस आरोप पर जिला अस्पताल की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। डॉक्टरों ने घटना के बाद ग्रामीण इलाकों में अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बच्चों को किसी भी अनजान पेड़ पौधे के फल या बीज खाने से रोकना चाहिए। यदि गलती से कोई अज्ञात फल या बीज खा लिया जाए और उसके बाद उल्टी, पेट दर्द या दस्त जैसे लक्षण दिखाई दें तो बच्चे को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

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