भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा अपने उद्देश्यों और व्यापक जनसंपर्क के चलते लगातार चर्चा में है। यात्रा के 16 दिनों में इसकी डिजिटल व्यूअरशिप 2 करोड़ 70 लाख तक पहुंच गई है। दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यात्रा के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना तथा दूसरा, राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र किए गए चंदे का हिसाब मांगना। उन्होंने कहा कि यह यात्रा इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर निकाली गई है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश में लोकतंत्र बचेगा या नहीं। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, वोटर लिस्ट और ईवीएम की पारदर्शिता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नागरिकों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि उनका वोट मतदाता सूची में दर्ज हो और जिस उम्मीदवार को वे वोट देना चाहते हैं, उनका वोट उसी को जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई चुनाव के नतीजों को लेकर नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों से है।

उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता को केवल सात सेकेंड के दर्शन की जगह वीवीपैट की पर्ची अपने हाथ में मिलनी चाहिए, ताकि वह स्वयं अपने मतदान की पुष्टि कर सके। उन्होंने ईवीएम के सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। दिग्विजय सिंह ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां 70 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए और चुनाव के बाद फिर जोड़े गए। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में मतदाताओं के मतदान के अधिकार का नुकसान होता है।

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे प्रमुख उद्देश्य पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे का हिसाब मांगने की उनकी मांग नई नहीं है। उन्होंने बताया कि 1993 में जब वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने राम मंदिर के शिलापूजन के लिए एकत्र किए गए चंदे का हिसाब मांगा था। उस समय उन्होंने स्वयं भी चंदा दिया था।

दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उस दौरान देशभर से करीब 1400 से 1700 करोड़ रुपये चंदा एकत्र होने की चर्चा थी। लोगों ने चांदी की शिलाएं तक भेंट की थीं, लेकिन उनके मुताबिक रिटर्न में केवल 8.29 करोड़ रुपये की राशि दिखाई गई। उन्होंने तत्कालीन पुजारी महंत बाबा लालदास का भी जिक्र किया, जिन्होंने विश्व हिंदू परिषद से चंदे का हिसाब मांगा था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सितंबर 1993 में उनकी हत्या कर दी गई और आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उनकी हत्या किसने की। उन्होंने कहा कि तब से वे चंदे का हिसाब मांग रहे हैं और आज भी उनका सवाल वही है- राम भक्त जागो, चंदे का हिसाब मांगो।

सनातन की व्यापक परिभाषा को लेकर भी रखी बात

दिग्विजय सिंह ने यात्रा के नाम और उसके वैचारिक उद्देश्य पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के जरिए सनातन धर्म की व्यापक परिभाषा को सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा की हिंदुत्व की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदुत्व और हिंदू धर्म को एक नहीं समझना चाहिए। उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सावरकर ने भी हिंदुत्व का धर्म से सीधा संबंध नहीं माना था।

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद शुरू हुई दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा  विभिन्न धार्मिक पड़ावों से गुजरते हुए मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जनजागरण कर रही है। उज्जैन से शुरू हुई यात्रा शाजापुर और राजगढ़ होते हुए गुना जिले में पहुंची और दिग्विजय सिंह के गृह नगर राघौगढ़ तक पहुंची। इस दौरान धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना, संतों से संवाद, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों से मुलाकात के साथ यात्रा के दोनों प्रमुख मुद्दों को लेकर लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। यात्रा को सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि महज 16 दिनों में इसकी व्यूअरशिप 2.70 करोड़ तक पहुंच गई है। दीपावली के अवसर पर पांच दिनों के विराम के बाद 11 नवंबर से पदयात्रा पुनः राघौगढ़ से शुरू होगी।