जबलपुर। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने बरगी बांध से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के उल्लंघन की बात कही गई है और लगातार हो रहे रिसाव तथा अपर्याप्त निगरानी प्रणालियों को बड़े जोखिम के रूप में चिन्हित किया गया है। एनडीएसए ने एनवीडीए को 30 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। 

नोटिस में कहा गया है कि बरगी बांध का संचालन और रखरखाव सार्वजनिक सुरक्षा और डाउनस्ट्रीम (निचले क्षेत्रों) में रहने वाली आबादी के लिए संभावित खतरा पैदा करता है। यह नोटिस एनडीएसए और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा हालिया निरीक्षण और रिकॉर्ड समीक्षा के बाद जारी किया गया है। निरीक्षण में सामने आया है कि बरगी बांध लंबे समय से गंभीर तकनीकी और प्रबंधन संबंधी खामियों से जूझ रहा है, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए हैं। 

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर चिंता बांध की मैसनरी स्पिलवे गैलरी से लगातार हो रहे भारी रिसाव को लेकर जताई गई है। एनडीएसए के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। केंद्रीय जल आयोग ने पहली बार 6 अप्रैल 1988 को एक पत्र में इस रिसाव की ओर ध्यान दिलाया था और उस समय आवश्यक सुधारात्मक उपायों की सिफारिश की थी। इसके बावजूद रिकॉर्ड बताते हैं कि 2018 से यह रिसाव लगातार रिपोर्ट किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी समाधान नहीं किया गया।

इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए प्राधिकरण ने कहा है कि इतने लंबे समय तक इस तरह की समस्या की अनदेखी करने से बांध की संरचनात्मक मजबूती कमजोर हो सकती है। यदि रिसाव को नियंत्रित नहीं किया गया, तो नींव और संरचना पर दबाव बढ़ने से बड़ी आपदा हो सकती है, जिसका सीधा असर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर पड़ेगा। एक अन्य महत्वपूर्ण कमी बांध में मापन एवं निगरानी प्रणाली का अभाव है। 

निरीक्षण दल के अनुसार, बरगी बांध में संरचनात्मक स्वास्थ्य, सीपेज (रिसाव) के व्यवहार और तनाव से जुड़े मानकों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था नहीं है। एनडीएसए ने स्पष्ट किया है कि मापन एवं निगरानी प्रणाली अत्यंत आवश्यक है और इनके अभाव से जोखिम और बढ़ जाता है। प्राधिकरण ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि "गैलरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश नियंत्रण की कमी है और अनधिकृत लोग खुलेआम आवाजाही कर रहे हैं। 

एनडीएसए ने इसे सुरक्षा और संचालन अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया है, जो किसी भी महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए अस्वीकार्य है।” इसके बावजूद, प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून निरीक्षणों के दौरान बरगी बांध को सुरक्षा श्रेणी- तीन (अर्थात मामूली कमियां) में वर्गीकृत किया गया है। एनडीएसए ने इस वर्गीकरण को वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं बताया और इसे “घोर लापरवाही” करार दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि इससे जोखिम को कम करके दिखाया गया है। 

एनडीएसए ने चेतावनी दी है कि यदि बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली स्थितियां बनी रहीं, तो अधिनियम की धाराओं 41 और 42 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इन धाराओं में जिम्मेदार अधिकारियों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हैं।

मामले पर बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने कहा कि बरगी बांध के नीचे जबलपुर और होशंगाबाद शहर तक के सैकड़ों गांव एवं कस्बे की सुरक्षा को नजरंदाज करना लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा है। संघ मांग करता है कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा उठाए गए सवालों को सार्वजनिक किया जाए।