वायनाड। केरल के वायनाड जिले में हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि, 4 अन्य अब भी लापता हैं। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस दुर्घटना में 10 लोग घायल हुए हैं। जिनका दो अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। लगातार बारिश और भारी मलबे के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।

यह हादसा वायनाड के मेप्पाडी क्षेत्र के कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के बीच निर्माण स्थल पर जमा खोदी गई मिट्टी का विशाल ढेर अचानक ढह गया। जिसकी वजह से आसपास का इलाका मलबे की चपेट में आ गया। पिछले 24 घंटों में मेप्पाडी में 226 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिसे हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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भूस्खलन की चपेट में एक चर्च और उसके पास स्थित एक मकान भी आ गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि मकान में रहने वाला परिवार मक्का की तीर्थयात्रा पर गया हुआ था और घटना के समय चर्च के भीतर भी कोई मौजूद नहीं था। जिसकी वजह से बड़ा नुकसान टल गया। वहीं, प्रभावित क्षेत्र को जोड़ने वाला पुल पूरी तरह मलबे में दब गया है। जिससे राहत दलों की आवाजाही प्रभावित हुई। रास्ता साफ करने और बचाव कार्यों को गति देने के लिए दो एक्सकेवेटर लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं।

घटना के समय आसपास कई निजी वाहन और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को लाने-ले जाने वाली एक बस भी खड़ी थी। आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं।

वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि लापता लोगों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में बचाव अभियान पूरी ताकत से जारी है। साथ ही उन्होंने यूडीएफ कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील की।

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केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मुख्यालय में आपात समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि लगातार बारिश के बावजूद बचाव दल पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कंपनी को कई बार निर्माण स्थल पर जमा की गई खोदी हुई मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए थे। इस संबंध में 20 जून को औपचारिक सरकारी आदेश भी जारी किया गया था लेकिन कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।

मुख्यमंत्री ने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी को वायनाड पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले मंत्री टी. सिद्दीकी ने कहा कि शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि सुरंग निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से नहीं रखा गया था। उनके अनुसार, पहले भी इस संबंध में चिंता जताई गई थी लेकिन उस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे प्राकृतिक नहीं बल्कि मानवजनित आपदा बताते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएगी और यह पता लगाएगी कि पूर्व में जारी चेतावनियों की अनदेखी क्यों की गई।

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