भोपाल। ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की नव-निर्मित 108 फीट ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ वननेस) के पिलर में खामी का खुलासा हुआ है। इसकी शिकायत अब सीबीआई तक पहुंच गई है। हैरानी की बात यह कि जिस अधिकारी ने इस खामी का पता लगाया उन्हें पद से हटा दिया गया है। मामला सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक गत 12 मई को सीबीआई, मप्र के मुख्य सचिव और लोकायुक्त को की गई शिकायत में कहा गया कि 2300 करोड़ की इस परियोजना में सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है। यह शिकायत प्रोजेक्ट से जुड़े तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी ने की है।
आरोप है कि जिस मुख्य पिलर पर पूरी प्रतिमा टिकी है, वह तय मानकों के अनुसार मजबूत नहीं है और उसमें झुकाव भी देखा गया है। इस प्रतिमा को 140 से 170 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं को झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया था। लेकिन तकनीकी जांच में पता चला की यह 120 किमी रफ्तार की हवा भी नहीं झेल सकती है।
200 करोड़ लागत वाली यह प्रतिमा चीन निर्मित है। शिकायत के मुताबिक जब तकनीकी खामियों की रिपोर्ट सामने आई, तो फील्ड डायरेक्टर बिश्वजीत बनर्जी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल अनुपम गुप्ता को पद से हटा दिया गया।
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि साइट पर मेजर एडमंड कीन नाम का व्यक्ति बिना किसी वैध सरकारी नियुक्ति के इंजीनियर-इन-चार्ज बनकर फैसले ले रहा था। उसने अधिकृत मुख्य इंजीनियरों के फैसलों को बार-बार बदला, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हुई।
बहरहाल, इस मामले पर कांग्रेस राज्य सरकार पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि हर धार्मिक स्थल पर एक तरह के मामले सामने आ रहे हैं जो अधिकारी भ्रष्टाचार, खामियों की शिकायत करता है बीजेपी सरकार उन्हें ही हटा देती है। मध्यप्रदेश में शंकराचार्य जी की प्रतिमा के मामले में भी यही हुआ है, शिकायत करने वाले फील्ड डायरेक्टर को हटा दिया गया है।
वहीं, पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने धार्मिक आस्था को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में 2300 करोड़ रुपए की परियोजना के अंतर्गत बनायी गई आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा जिस स्तंभ पर स्थापित है, वह स्तंभ झुक जाने की रिपोर्ट सामने आआई है। इससे पहले उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण में भ्रष्टाचार सबने देखा है जब वहाँ ऋषियों की प्रतिमाएँ तेज हवा में उड़ गई थीं। देश के सामने स्पष्ट है कि चाहे उज्जैन हो या अयोध्या या ओंकारेश्वर, जहाँ भाजपा है, वहाँ धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार होना ही है।