नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में 33 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय पर लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये से अधिक के पर्यावरणीय मुआवजे (एनवायरमेंटल कंपेनसेशन) की वसूली की पूरी प्रक्रिया अगले तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। एनजीटी ने पाया कि बोर्ड उसके पहले दिए गए आदेश की तय समयसीमा में पालन नहीं कर सका था। इसलिए अंतिम अवसर देते हुए समय बढ़ाया गया है।
7 जुलाई के आदेश में एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अवैध पेड़ कटाई के लिए 2,65,06,877.08 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा निर्धारित कर दिया है और वसूली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि अगस्त 2025 में दिए गए उसके निर्देश के बावजूद बोर्ड तीन महीने के भीतर कार्रवाई पूरी नहीं कर पाया। इसलिए अब विस्तारित अवधि में इसे पूरा करना होगा।
यह मामला अधिवक्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के लगभग 1,300 एकड़ के परिसर में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। शिकायत के बाद एनजीटी ने एक संयुक्त जांच समिति गठित की थी। समिति की जांच में सामने आया कि परिसर में सात चंदन के पेड़ों सहित कुल 33 पेड़ बिना अनुमति काटे गए थे।
जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रिब्यूनल ने अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर जुर्माना तय करने और तीन महीने के भीतर वसूली की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया था। तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी कार्रवाई पूरी नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने आदेश के अनुपालन के लिए ट्रिब्यूनल में एक्जीक्यूशन आवेदन दायर किया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन्हें सूचित किया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ और सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों के कारण वसूली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। वहीं, हालिया सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से ट्रिब्यूनल को बताया गया कि अब पर्यावरणीय मुआवजे की राशि निर्धारित कर दी गई है और वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने मंडलीय वनाधिकारी (DFO) की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। रिपोर्ट के अनुसार, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने कंपेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन के तहत साल 2025 में 978 पौधे लगाए हैं। निरीक्षण के दौरान इनमें से 859 पौधे जीवित और स्वस्थ पाए गए। ट्रिब्यूनल ने इस प्रगति को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण की कार्रवाई अपनी जगह है लेकिन पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली की प्रक्रिया भी तय समय के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।