पन्ना। मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध तेज हो गया है। इस परियोजना के कारण विस्थापन का दंश झेलने को मजबूर परिवारों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण भारी बारिश के बीच उफनती नदी में उतर चुके हैं। वे "हमें हमारा हक दो या जल समाधि दे दो" के नारे लगा रहे हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर-पन्ना सीमा पर ढोडन बांध का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के आंदोलन में बच्चों से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग सभी शिरकत कर रहे हैं और चिता पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आदिवासी महिलाएं नवजात बच्चों को भी गोद में लेकर तेज दिनभर प्रदर्शन करती रहती हैं।
आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन पर खुलकर घूस मांगने और पुलिस का डर दिखाकर उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने का आरोप लगाया है। एक महिला राजा बाई ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, हमारे साथ हो रहे इस घोर अन्याय से तो अच्छा है कि हमें मार दिया जाए। प्रदर्शनकारी अमित भटनागर ने सरकार और प्रशासन पर आंदोलन को दबाने के लिए संवेदनशीलता की सभी हदें पार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों के लिए राशन, पानी, बिजली और दवाओं की आपूर्ति पर रोक लगा दी गई है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार सरकार उन्हें गंदा पानी पीने के लिए मजबूर कर रही है। आंदोलनकारियों का मनोबल तोड़ने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई जा रही इन दमनकारी नीतियों के खिलाफ ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे सत्याग्रह खत्म नहीं करेंगे। आंदोलनकारी 'अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है' और 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगा रहे हैं।
जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में आमरण अनशन और मिट्टी सत्याग्रह भी जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास दे या फिर इसी जल सत्याग्रह में उनकी मौत होने दे। उधर, मामले पर पूर्व कैबिनेट मंत्री और पन्ना से भाजपा विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने मझगांय, रूंझ और केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति परिवार ₹12.50 लाख तक का एकमुश्त पुनर्वास अनुदान दिया जाएगा।